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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part2

May 12, 2013

कनपुरिया चला एनआरआई बनने


लुफ्थांसा की फ्लाइट से अटलांटा जाना था। दिल्ली तक परिवार छोड़ने आया था। पहली बार विदेश जाने का अनुभव भी आम की तरह खट्टा मीठा होता है। परिवार से विछोह सालता है। नए देश के अनजाने बिंब मन में घुमड़ते हैं कि जो कुछ अब तक सिर्फ़ तस्वीरों में देखा है वह साकार होने जा रहा है। एक अजीब सी अनिश्चितता परेशान करती है कि पहले खुद को बाद में परिवार को एकदम अनजानी धरती पर स्थापित करना है। यह सब रोमांचक भी है और कठिन भी। वह सब याद करने पर एक फ़िल्म का डायलॉग याद आता है, 'अ लीग ऑफ देअर ओन' में महिला बेसबालकोच बने टाम हैक्स अपनी मुश्किलों पर आंसू बहाती एक लड़की पर चिल्लाते है कि "अगर यह खेल मुश्किल न होता तो हर कोई इसका खिलाड़ी होता। फिर मुश्किलों पर आंसू क्यों बहाना?" सच भी है जब दूसरे छोर पर सुनहरे भविष्य की किरणें दिखती हैं तो न जाने कहां से हर मुश्किल हल करने की जीवटता आ जाती है। खालिस कनपुरिया को अच्छा ख़ासा एनआरआई बनते देर नहीं लगती।

 

प्लेन को क्या बाराबंकी की बस समझ रखा है?

दिल्ली के इंदिरा गांधी एअरपोर्ट पर औपचारिकताएं निपटाते हुए एक मज़ेदार वाक्या याद आ गया। लखनऊ में साथ में एक अनिल भाई साथ में काम करते थे। अनिल को हमारे सब साथी प्यार से गंजा कहते थे क्योंकि वह बहुत छोटे बाल रखता था। ख़ैर हमारा प्यारा गंजा विश्व बैंक के गोमती प्रोजेक्ट पर हमारी कंपनी की तरफ़ से कुछ काम में लगा था। प्रोजेक्ट मैनेजर को दिल्ली में प्रोजेक्ट रिपोर्ट दिखानी थी। प्रोजेक्ट रिपोर्ट तो गंजू भाई ने बड़ी धांसू बना दी। पर प्रोजेक्ट मैनेजर में प्रोजेक्ट कमेटी के सवालों की बौछार और कंप्यूटर पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट को एक साथ चलाने का माद्दा नहीं था, चुनांचे उसने गंजे को दिल्ली साथ चलने का हुक्म तामील कर दिया। गंजा बाराबंकी का रहने वाला था और मेरी तरह उसने भी एरोप्लेन को या तो तस्वीरों में देखा था या टीवी पर। ख़ैर जनाब अपने प्रोजेक्ट मैनेजर के साथ दिल्ली की फ्लाइट पर सवार हो गए। गंजू भाई बाकी यूपीवालों की तरह पानमसाले के शौकिन थें और हवाई यात्रा में भी मसाला मुंह में दबाए हुए थे। उन्होंने सोचा कि मौका पाकर हवाई जहाज के शौचालय में पीक थूक देंगे। पर कुछ देर में नींद लग गई। आधे घंटे बाद नींद खुली तो आदतन पीक नीचे थूकने के लिए खिड़की खोलने की नाकामयाब कोशिश की। खिड़की नहीं खुली तो ताव में पीक पिच्च से पांव के नीचे ही थूक दी। दरअसल गहरी नींद से जागने के बाद गंजू भाई भूल गए थे कि वह दिल्ली तशरीफ़ ले जाए जा रहे हैं, उनको गफ़लत थी कि वह बाराबंकी जाने की बस पर सवार है। बगल वाले यात्रियों के चिल्लपों मचाने पर गंजू भाई उनसे बाराबंकी वाले अंदाज़ में भिड़ गए। इस धमाल के बीच परिचारिका एअरहोस्टेस आ गई और पीक देख कर गंजू भाई की ओर उसने भृकुटी तानकर पूछा कि यह क्या है? गंजू भाई अभी भी किंकर्तव्यविमूढ़ थे कि यह बस में लेडी कंडक्टर कहां से आ गई? उन्होंने बड़े भोलेपन से पूछा क्या बाराबंकी आ गया? एअरहोस्टेस ने कर्कश स्वर में जवाबी सवाल किया, "प्लेन को क्या बाराबंकी की बस समझ रखा है?" अब मामला गंजू भाई की समझ में आ गया था, आगे क्या हुआ यह बताना गंजू भाई की तौहीन होगी।

 

यह लेमन वाटर क्या होता है?

मैंने लुफ्थांसा की फ्लाइट में दो नादानियां की थीं। पहले तो जब एअरहोस्टेस ने मुस्कुराते हुए इअरफ़ोन दिया तो मैंने भी मुस्कुराते हुए यह सोचकर वापस कर दिया कि भला विदेशी संगीत सुनकर क्या करूंगा। यह देर से पता चला कि प्लेन पर फ़िल्में देखने का भी इंतज़ाम होता है। फिल्म पंद्रह मिनट की निकल गई तब जाकर पता चला कि एअरहोस्टेस को बुलाने के लिए अपने हाथ के पास लगा बटन दबाना पर्याप्त है। दूसरी नादानी खाने के बाद काफी लेकर की। अपने उत्तर भारत में काफी दूध वगैरे डालकर मीठी पीते हैं। अंगे्रजों की काफी एकदम काली और ज़हर के मानिंद कड़वी लगी। कुछ–कुछ ऐसी ही काफी दक्षिण भारत में भी प्रचलित है। ख़ैर एअरहोस्टेस से लेमन वाटर मांगा। एअरहोस्टेस ने हैरत जताई कि उसने कभी लेमन वाटर के बारे में नहीं सुना। बाद में वह सादे पानी में कटा नीबू डालकर ले आई। अब इस तरह का लेमन वाटर तो अपने यहां होटल में खाने के बाद चिकने हाथ साफ़ करने में उपयोग होता है जिसे कभी–कभी कोई देहाती नादानी में पी भी जाता है, यहां मैं देहाती बन गया था। पता ही नहीं था कि विदेशों में लेमन वाटर लेमोनेड के नाम से जाना जाता है। हो सकता है कि एअरहोस्टेस को नहीं पता होगा अतः सदाशयता में वह सादे पानी में कटा नींबू डालकर ले आई। पर शायद एअरलाइन के कर्मचारियों को यह ट्रेनिंग तो दी जाती है कि दुनिया के अलग–अलग हिस्सों में कुछ खाद्य पदार्थ अलग नाम से भी प्रचलित है। ऐसे मामलों में यह गोरे लोग विशुद्ध घोंघाबसंत बनकर क्या रेशियल प्रोफाइलिंग नहीं करते? सोचिए अगर एअरइंडिया की एअरहोस्टेस किसी अमेरिकी के एगप्लांट मांगने पर अंडों पर मूली के पत्ते सजाकर पेश कर दें तो क्या होगा?

Contd..

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