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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 7

May 17, 2013

अर्थ -  अनर्थ 

 

"सोती किधर हैं ?

 

यह घटना किसी चुटकुले से कम नहीं है। घटना की संवेदनशीलता को मद्देनज़र रखते हुए मैंने इसके दो पात्रों (तीसरी पात्रा से अब संपर्क नहीं है) से इसे  संस्मरण  में  शामिल करने की पूर्वानुमति ले ली है। बात मेरे पहली कार ख़रीद लेने के बाद की है पर हमारे कंपनी गेस्ट हाऊस से जुड़े होने के कारण इसका ज़िक्र इस अध्याय में ही उचित होगा। मेरे इंजिनीयरिंग कॉलेज में साथ पढ़े पांच छः मित्र तीन महीनों के अंतराल पर हमारी कंपनी में ही नियुक्त होकर अमेरिका आए। कंपनी के गेस्ट हाउस का फ़ोन नंबर, इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़े अमेरिका में मौजूद तकरीबन सभी मित्रों को पता था। प्रायः सभी मित्र नए आने वाले दोस्तों को फ़ोन लगाकर उनके हालचाल पूछ लेते थे और ज़रूरी सलाह मशविरा भी दे देते थे। मैं चूंकि अटलांटा में प्रोजेक्ट पर कार्यरत था अतः गेस्ट हाउस में आने वाले मित्रों से आसानी से मिल सकता था। एक बार मेरे से एक साल वरिष्ठ सहपाठी श्रीमान सोती जी गेस्ट हाऊस में पधारे। सोती जी बहुत ही विनम्र स्वभाव के मित्र हैं। उस सप्ताहांत पर मैं गेस्ट हाऊस गया और उन्हें लेकर अपनी कार से अटलांटा भ्रमण पर निकल गया। उसी सप्ताह गेस्ट हाउस में दो और नए प्राणी आए थे, एक बंदा जिसका मुझे नाम याद नहीं और एक बंदी मोनिका। उन दोनों से हम लोगों ने जाते हुए पूछ लिया था कि उन्हें इंडियन ग्रोसरी से कुछ मंगाना तो नहीं। शाम को मैंने सोती जी को गेस्ट हाउस वापस छोड़ा और अपने अपार्टमेंट को चल दिया। मेरे रूम पार्टनर सत्यनारायण स्वामी ने बताया कि मेरे लिए किन्हीं गोस्वामी का फ़ोन था। गोस्वामी जी भी मेरे वरिष्ठ सहपाठी है और श्रीमान सोती के बैचमेट हैं। गोस्वामी जी बहुत ही मिलनसार एवं विनोदी स्वभाव के हैं। गोस्वामी जी से हुआ वार्तालाप प्रस्तुत है–


मैं : गुरूजी, नमस्कार।
गोस्वामी जी : नमस्कार प्रभू, क्या गुरू खुद भी घूमते रहते हो और हमारे सोती जी को भी आवारागर्दी की आदत डलवा रहे हो।
मैं : अरे गोस्वामी जी सरकार, अब अपने मित्र भारत से नए नए आते हैं, पास में कार तो होती नहीं, तो थोड़ी सेवा ही सही। सोती जी को शापिंग कराने ले गया था।
गोस्वामी जी : अच्छा अच्छा। यार पर एक बात बता, गेस्ट हाउस में भाभीजी भी साथ आई है क्या? और क्या भाभी बहुत तेजतर्राट है या आज उनका सोती से सवेरे सवेरे झगड़ा हुआ था?
मैं : भाभीजी? तेजतर्राट? अरे गुरूदेव, सोती साहब तो अकेले आए हैं, भाभी बाद में आएंगी। आपको किसने कह दिया कि उनका कोई झगड़ा हुआ है?
गोस्वामी जी : यार लगता है कुछ लोचा हो गया है। कुछ समझ नहीं आ रहा। मैंने सवेरे गेस्ट हाउस सोती को फोन लगाया था। सोती तो मिला नहीं, फ़ोन पर किसी महिला की आवाज़ आई। मैं समझा कि शायद सोती भारत से भाभीजी को साथ लाया है। मैंने नमस्ते की और बताया कि गेस्ट हाउस का नंबर मैंने तुझसे लिया है।
मैं : फिर?
गोस्वामी जी : मैंने उन मोहतरमा से पूछा कि "सोती किधर हैं ?" पर इतना पूछते ही वह भड़क गई, कहने लगी कि आपको तमीज़ नहीं है। आप महिलाओं से उलजलूल सवाल पूछते हैं, आपको शर्म आनी चाहिए। यह कहकर उन मोहतरमा ने फ़ोन ही पटक दिया। अब यार तू ही बता, मैंनें कौन सा ऊलजलूल सवाल पूछा?


मैं भी पशोपेश में पड़ गया कि गोस्वामी जी से ऐसी कौन सी खता हो गई जो मोनिका जी क्रुद्ध हो गईं। चूंकि मोेनिका जी अगले ही दिन किसी दूसरे प्रांत चली गई, अतः उनसे संपर्क नहीं हो सका। हालांकि बाद में जब यह वृतांत अन्य मित्रों को बताया गया तो वह सब के सब हंस–हंस के दोहरे हो गए। उनके जवाब "जाकी रही भावना जैसी, प्रश्न का अर्थ समझे तिन तैसी" ने गुत्थी सुलझा दी। अफ़सोस कि मोनिका जी को हम यह स्पष्टीकरण नहीं दे सके। यदि आपको मोनिका जी कहीं मिले तो आप उन्हें बता दीजिएगा कि गोस्वामी जी ने तो उनसे सिर्फ़ अपने मित्र सोती जी का ठिकाना पूछा था।

 

गोस्वामी जी की आंसरिंग मशीन


 10 -12 साल पहले आंसरिंग मशीन का चलन दिल्ली , मुम्बई में  आम बात थी   पर छोटे शहरोँ के लिए  नयी चीज़ थी। प्रहसन तब होता है जब यह अजूबा किसी छोटे शहर में पहुंच जाए। हमारे गोस्वामी जी भारत यात्रा से लौटकर आए तो सुनाने के लिए उनके पास यही प्रहसन था। बेचारे एक अदद आंसरिंग मशीन ले गए अपने मथुरा वाले घर में। उन्होंने आंसरिंग मशीन को फ़ोन कनेक्ट करके रख दिया और बाकी परिवार के साथ छत पर जाकर चाय पीने लगे। तभी नीचे से नौकर चिल्लाया कि "भइया जिज्जाजी ईं भोंपू से कईस चिलाय रहे हैं?" सबने नीचे झांका तो विकट दृश्य था। गोस्वामी जी के पड़ोस के मुहल्ले में रहने वाले जीजाजी ने फ़ोन किया था। फ़ोन चार घंटी बजते ही आंसरिंग मशीन पर ट्रांसफर हो गया। आगे का नज़ारा खुद गोस्वामी जी के शब्दों में–


आंसरिंग मशीन : श्री कुंदन गोस्वामी जी गोस्वामी जी के पिताश्री इस समय . . .
जीजाजी : हल्लो, हल्लो
आंसरिंग मशीन : . . .या तो व्यस्त है या . . .
जीजाजी : अरे कौन बोल रहा है बिरजू गोस्वामी जी का घरेलू नाम ?
आंसरिंग मशीन : . . .या घर में नहीं है . . .
जीजाजी : अरे बिरजू ई हम है मुरली खुद जीजाश्री पहिचाने नहीं का?
आंसरिंग मशीन : . . .आप कृपया बीप बजने के . . .
जीजाजी : अरे तुम कहीं संतू गोस्वामी जी का नटखट भतीजा तो नहीं हो, ई का शैतानी कर रहे हो छोरा लोग? चाचा की आवाज़ बना के बोलत हौ?
आंसरिंग मशीन : . . .बाद अपना संदेश रिकार्ड करें, . . .
जीजाजी : अरे का रिकार्ड करें, हम कोई गवैया है का? हे संतू, तनिक चाचा गोस्वामी जी को बुलाओ।
आंसरिंग मशीन : . . .बीप . . .
जीजाजी : ए संतू तुम लोग बहुत शरारती हो गए हो, चाचा की आवाज़ बना के बोलते हो, अरे काम की बात करनी है, बुलाओ जल्दी चाचा को, नहीं तो हम आ रहे हैं।
आंसरिंग मशीन : . . .सन्नाटा . . .
जीजाजी : अच्छा नाही मनिहौ, अभी हम आवत है तुम्हारी कुटम्मस करै की ख़ातिर। धड़ाक से फ़ोन पटकने की आवाज़।


इधर संतू मियां जो पास ही खेल रहे थे, जीजाश्री की आवाज़ सुनकर सिहर गए। जीजाजी के खांमखा में संभावित आक्रमण  की धमकी से उनकी पैंट भी गीली हो गई थी। गोस्वामी जी के पिताजी अलग चिल्ला रहे थे कि यह क्या तमाशा है, यहां किसी को इन सब झमेलों का शऊर नहीं है। तभी गोस्वामी जी की मुश्किलों में इज़ाफा करते गुस्से में लाल पीले जीजाश्री का अवतरण हुआ। आते ही भाषण चालू कि तुम लोगों ने लड़कों को बिगाड़ रखा है, फ़ोन तक पर मज़ाक करते हैं, बड़ों की आवाज़ की नकल करके बेवकूफ़ बनाते हैं वगैरह–वगैरह। जीजाश्री को लस्सी पिला कर ठंडा किया गया और फिर उन्हीं की आवाज़ आंसरिंग मशीन पर सुनाई गई। आशा के विपरीत जीजाश्री का कथन था "लाला ई भोंपू हमरे लिए काहे नहीं लाए। बहुत काम की चीज़ लगत है।" और आशानुसार गोस्वामी जी के पिताजी ने तुरंत बवालेजान यानि की आंसरिंग मशीन को जीजाश्री के सुपुर्द कर दिया।

 

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