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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 14

May 25, 2013

पागल कौन?


एक रात में मेरे चाचाश्री का फ़ोन आया। वे मिर्ज़ापुर के पास किसी फैक्ट्री में सहायक जनरल मैनेजर हैं। चाचाश्री कानपुर न आ पाने का कारण बता रहे थे। कारण सुन कर सब हंस–हंस कर दोहरे हो गए।

चाचाश्री की फैक्ट्री में कोई गार्ड था संतराम। किसी मानसिक परेशानी के चलते उसका दिमाग़ फिर गया और वह फैक्ट्री में तोड़फोड़ करने लगा। चाचाश्री ने संतराम को दो चौकीदारों के साथ फैक्ट्री के डाक्टर का सिफ़ारशी पत्र देकर रांची मानसिक चिकित्सालय ले जाकर भर्ती कराने का आदेश दिया। चाचाश्री ने दोनों को निर्देश दिया था कि रांची पहुंच कर वहां के डाक्टर से बात करवा दें।

अगले रविवार को चाचाश्री को कानपुर आना था। पर न जाने क्यों दोनों चौकीदारों का रांची पहुंच कर कोई फ़ोन नहीं आया। चाचाश्री दोनों चौकीदारों की गै.रज़िम्मेदारी को लानतें भेजते हुऐ शनिवार को सो गए। रात में बंगले के दरवाज़े की घंटी बजी। चाचाश्री ने लाईट खोल कर देखा तो संतराम खड़ा था। चाची की चीख निकलते–निकलते बची। चाचाश्री ने चाची को संयत रहने का इशारा किया। चाचाश्री ने देखा संतराम फिलहाल तो सामान्य लग रहा था। उसने चाचाश्री को हाथ जोड़कर नमस्कार भी किया। चाचाश्री ने उसे वहीं बैठने को कहा और खुद यथासंभव दिखने की कोशिश करते हुए उससे दस फुट दूर सोफे पर बैठ गए। अब पागल का क्या भरोसा, कहीं हमला ही कर दे। चाचाश्री सोच रहे थे कि शायद यह उन दोनों चौकीदारों से निगाह बचाकर भाग आया है और वे दोनों चौकीदार या तो इसे ढू.ंढ़ रहे होंगे या फिर मारे डर के वापस ही नही आए। उसी उधेड़बुन में चाचाश्री ने संतराम से पूछा,


चाचाश्री : कहो संतराम कैसे हो?
संतराम : जी साहब, दया है आपकी।
चाचाश्री : अकेले आए हो?
संतराम : जी साहब।
चाचाश्री : वह दोनों कहां हैं?
संतराम : कौन साहब?
चाचाश्री : अरे दोनों चौकीदार, जो तुम्हारे साथ रांची गए थे?
संतराम : साहब, उन दोनों को मैं भर्ती करा आया।
चाचाश्री कुर्सी से उछलते हुए : क्या!
संतराम : जी साहब, कल भर्ती कराया था, अगली ट्रेन पकड़ कर मैं डयूटी पर टैम से वापस आ गया।


चाचाश्री ने संतराम को चाय पिलाने के लिए इंतज़ार करने को कहकर दूसरे कमरे में फ़ोन करने आ गए। चाची संतराम पर निगाह रखे थीं। संतराम बिल्कुल सामान्य दिख रहा था। चाचाश्री ने रांची मानसिक चिकित्सालय फ़ोन मिलाया तो सुपरवाईज़र ने बताया कि उनकी फैक्ट्री से एक चौकीदार दो पागलों को भर्ती करा गया है। भर्ती के दिन से दोनों ने बवाल मचा रखा है और रह रह कर दोनों आसमान सर पर उठा लेते हैं। चाचाश्री ने सुपरवाईज़र को बड़ी मुश्किल से यकीन दिलाया कि उसने पागल को छोड़कर दो भलेमानुषों को भर्ती कर लिया है। चाचाश्री ने अबकी बार छः चौकीदारों को संतराम के साथ रांची भेजा। इस बार संतराम को भर्ती कराने में कोई बखेड़ा नहीं हुआ। पिछली बार गए दोनों चौकीदार वापस आते ही चाचाश्री के पैरों में लौटकर रोने लगे और दुहाई मांगने लगे कि आगे से उन्हें किसी पागल के साथ न भेजें। दोनों ने रांची की कहानी सुनाई।


दोनों चौकीदारों के साथ संतराम बिल्कुल मोम के पुतले की तरह शांत बैठे बैठै रांची तक गया। दोनों ने उसे रिक्शे के बीच बैठाल कर स्टेशन से मानसिक चिकित्सालय ले जाने लगे। मानसिक चिकित्सालय का गेट पास आते ही संतराम रिक्शे से कूदकर भागा और चिकित्सालय के अंदर घुस गया। उसे जो भी पहला डाक्टर दिखा उसके पैर पकड़ कर वह ज़ोर–ज़ोर से रोने लगा। उसने चिल्ला चिल्ला कर कर कहा कि उसे दो पागलों ने घेर लिया है और उसे बाहर बहुत मार रहे हैं।

यह सुनकर डाक्टर ने चार वार्ड ब्वाय बाहर भेजे जहां वाकई दोनों चौकीदार चिकित्सालय की ओर बदहवास से भागे आ रहे थे। वार्ड ब्वायज़ यहीं समझे कि दोनों वाकई पागल हैं और संतराम को ढूंढ़ रहे हैं। दोनों चौकीदारों को जबरदस्ती हवा में टांग के डाक्टर के सामने लाया गया। दोनों खुद को छु.ड़ाने के लिए गुल गपाड़ा मचाए थे और संतराम को पागल बता रहे थे। डाक्टर ने उन्हें डपट कर कहा कि हर पागल खुद को समझदार और दूसरों को पागल कहता है। यह सुनकर चौकीदार वार्डब्वायज़ को पागल बताने लगे। दोनों को बांधने के लिए वार्ड ब्वायज को उन्हें थोड़ा बहुत पीटना भी पड़ा। ज़्यादा हंगामा करने पर उन्हें बेहोशी के इंजेक्शन ठोंक दिए गए। संतराम जी तो उन्हें शान से भर्ती कराकर मिर्ज़ापुर चल दिए, पर वार्डब्वायज़ की पिटाई से उन बेचारे चौकीदारों के शरीर के सारे जोड़ खुल गए।

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