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About Asaram Bapu , Modi & Muzaffarnagar Riots

September 19, 2013

अगला एक साल ज्योतिष की नज़र से

 इस साल जून के आरम्भ से नमो का शोर बढ़ गया है और हर कोई जानना चाहता है कि आखिर नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन पाएंगे या नहीं और पिछले हफ्ते भाजपा ने उन्हें अपना आधिकारिक उम्मीदवार भी घोषित कर दिया ।

मजे की बात यह है कि देश के संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री का चुनाव देश के सांसदों को चुनाव जीतने के बाद करना होता है परन्तु हमारे देश की राजनैतिक पार्टियों द्वारा बिना संविधान बदले अमेरिकी प्रेजिडेंट की तरह प्रधानमंत्री का नाम पहले से ही 2009 के आमचुनाव में घोषित कर दिया था और पूरा चुनाव अडवानी बनाम मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री के घोषित प्रत्याशी के तौर पर लड़ा गया था ।

वैसे इस तरीके में कोई बुराई नहीं है क्योंकि इससे 543 सांसदों के खर्चों से  बचा जा सकता है। खैर , मेरा मकसद जून 2013 से मई 2014 के राजनैतिक मौसम का ज्योतिषीय अनुमान लगाना था । 

इसके लिए पहले संक्षेप में भारत की स्वतंत्रता वाली कुंडली के हिसाब से विचार करते हैं। भारत की कुंडली में इस समय 2009 से 2015 तक सूर्य महादशा है जो कि शासक वर्ग के लिए अपमान जनक है। नीचे दिए हुए चार्ट में भारत की राशि कर्क से गुरु व शनि ग्रह की वर्तमान राशि स्थिति दिखाई गयी है।

 गुरु ग्रह जून 2013 से एक साल के लिए मिथुन राशि में पहुँच गया है जो भारत की कुंडली में 12 वें भाव में है , वहां से उसकी दृष्टि चौथे भाव (विपक्ष ), छठे भाव ( दंगे फसाद ) व आठवें मृत्यु भाव (अप्रत्याशित घटना) पर पड़ रही है अत: अगले एक साल में विपक्ष प्रबल रहेगा ,दंगे फसाद व एक सर्वथा अप्रत्याशित घटना का योग है जिससे भारतीय राजनीति में 1991 के चुनाव जैसे मोड़ की संभावना है।

शनि नवम्बर 2011 से अक्टूबर 2014 तक तुला राशि में है जो कि चौथे भाव (विपक्ष) में बैठ कर छठे भाव (दंगे फसाद) , दसवें ( सरकार ) व लग्न (जनता) को देख रहा है। इसके कारण विपक्ष प्रबल , सरकार संदेह के घेरे में , दंगे फसाद व आन्दोलनों से जनता त्रस्त रहेगी।

धार्मिक दंगों का समय

भारतीय ज्योतिष के अनुसार जिस भी राशी में गुरु और शनि एक साथ मौजूद हों या उनकी एक साथ दृष्टि पड़ जाए तो उस राशि से सम्बंधित कार्य क्षेत्र न सिर्फ काफी चर्चा में आ जाते हैं बल्कि एक तरह से उनका अच्छे से आडिट हो जाता है।

जैसा कि नीचे दिए चित्र में दिखाया गया है , वर्तमान में , तुला व धनु राशियाँ इसी स्थिति से गुजर रही हैं। तुला राशि ऐशो आराम , भोग और साथ में न्याय के लिए जानी जाती है और धनु राशी धर्म से जुड़े मामलों के लिए होती है। यह स्थिति इस साल जून से लेकर अगले साल मई तक है।

   इसके परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं , आशाराम बापू जैसे पावरफुल गुरु की ऐशो आराम की जांच चल रही है। धार्मिक दंगों की शुरुआत हो चुकी है। इससे पहले गुरु ग्रह की मिथुन स्थिति जून 2001 से जून 2002 में थी जिसमें गुजरात के गोधरा ( फरवरी 2002 ) के दंगे हुए थे। प्रत्येक 12 वर्ष बाद गुरु ग्रह के मिथुन राशि में पहुँचने के साथ ही उसकी धनु राशि पर सीधी दृष्टि पड़ते ही धार्मिक उन्माद की शुरुआत हो जाती है।

   सन 1990 के धार्मिक उन्माद के समय भी गुरु मिथुन राशि में था। मिथुन राशि यात्रा , यातायात व संचार की राशी है जो गुरु ग्रह  के शत्रु बुध ग्रह के अंतर्गत है. अत: इन सभी दंगों में यातायात (साबरमती ट्रेन -गोधरा ), रथ यात्राएं व नए जमाने में संचार ( मुज़फ्फरनगर दंगा -मोबाइल -फेसबुक वीडियो क्लिप ) का दुरूपयोग कर के दंगे आरम्भ किए गए।

   लेकिन इस बार शनि की भी दृष्टि धर्म भाव पर होने से मामला गंभीर है और धार्मिक फसादों से हानि की संभावना अत्यधिक है और सरकारी तंत्र पर शनि दृष्टि होने से दंगा नियंत्रण राजनीतिक कारणों से देरी से होने की संभावना है। अत: सभी सभ्य नागरिकों से यह आशा की जाती है कि इन ज्योतिषीय तथ्यों को ध्यान में रखते हुए संचार व सोशल मीडिया  को सावधानी से प्रयोग करें , अफवाहों पर ध्यान न दें और स्थिति को नियंत्रण में रखने में अपना योगदान दें। 

   रही बात नमो और भाजपा की तो सभी निष्पक्ष ज्योतिषी इस बात पर एक मत हैं कि प्रधानमंत्री बनने की उनकी राह थोड़ी कठिन  है और भाजपा के कार्यकाल में पड़ोसी मुल्कों से ( भाजपा की मिथुन लग्न और वृश्चिक राशि की वजह से) तनातनी व युद्ध की संभावना भी ज्यादा रहती है।

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I agree with your view point, But above all All Mighty ALLAHA will save its people Mankind including India from evil happenings. HE has created & HE has the authority to destroy too. Rest hope that people & India live in peace & grow.



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