Menu

Use Behavioural Astrology

Blog posts : "Hindi"

About Asaram Bapu , Modi & Muzaffarnagar Riots

अगला एक साल ज्योतिष की नज़र से

 इस साल जून के आरम्भ से नमो का शोर बढ़ गया है और हर कोई जानना चाहता है कि आखिर नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन पाएंगे या नहीं और पिछले हफ्ते भाजपा ने उन्हें अपना आधिकारिक उम्मीदवार भी घोषित कर दिया ।

मजे की बात यह है कि देश के संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री का चुनाव देश के सांसदों को चुनाव जीतने के बाद करना होता है परन्तु हमारे देश की राजनैतिक पार्टियों द्वारा बिना संविधान बदले अमेरिकी प्रेजिडेंट की तरह प्रधानमंत्री का नाम पहले से ही 2009 के आमचुनाव में घोषित कर दिया था और पूरा चुनाव अडवानी बनाम मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री के घोषित प्रत्याशी के तौर पर लड़ा गया था ।

वैसे इस तरीके में कोई बुराई नहीं है क्योंकि इससे 543 सांसदों के खर्चों से  बचा जा सकता है। खैर , मेरा मकसद जून 2013 से मई 2014 के राजनैतिक मौसम का ज्योतिषीय अनुमान लगाना था । 

इसके लिए पहले संक्षेप में भारत की स्वतंत्रता वाली कुंडली के हिसाब से विचार करते हैं। भारत की कुंडली में इस समय 2009 से 2015 तक सूर्य महादशा है जो कि शासक वर्ग के लिए अपमान जनक है। नीचे दिए हुए चार्ट में भारत की राशि कर्क से गुरु व शनि ग्रह की वर्तमान राशि स्थिति दिखाई गयी है।

 गुरु ग्रह जून 2013 से एक साल के लिए मिथुन राशि में पहुँच गया है जो भारत की कुंडली में 12 वें भाव में है , वहां से उसकी दृष्टि चौथे भाव (विपक्ष ), छठे भाव ( दंगे फसाद ) व आठवें मृत्यु भाव (अप्रत्याशित घटना) पर पड़ रही है अत: अगले एक साल में विपक्ष प्रबल रहेगा ,दंगे फसाद व एक सर्वथा अप्रत्याशित घटना का योग है जिससे भारतीय राजनीति में 1991 के चुनाव जैसे मोड़ की संभावना है।

शनि नवम्बर 2011 से अक्टूबर 2014 तक तुला राशि में है जो कि चौथे भाव (विपक्ष) में बैठ कर छठे भाव (दंगे फसाद) , दसवें ( सरकार ) व लग्न (जनता) को देख रहा है। इसके कारण विपक्ष प्रबल , सरकार संदेह के घेरे में , दंगे फसाद व आन्दोलनों से जनता त्रस्त रहेगी।

धार्मिक दंगों का समय

भारतीय ज्योतिष के अनुसार जिस भी राशी में गुरु और शनि एक साथ मौजूद हों या उनकी एक साथ दृष्टि पड़ जाए तो उस राशि से सम्बंधित कार्य क्षेत्र न सिर्फ काफी चर्चा में आ जाते हैं बल्कि एक तरह से उनका अच्छे से आडिट हो जाता है।

जैसा कि नीचे दिए चित्र में दिखाया गया है , वर्तमान में , तुला व धनु राशियाँ इसी स्थिति से गुजर रही हैं। तुला राशि ऐशो आराम , भोग और साथ में न्याय के लिए जानी जाती है और धनु राशी धर्म से जुड़े मामलों के लिए होती है। यह स्थिति इस साल जून से लेकर अगले साल मई तक है।

   इसके परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं , आशाराम बापू जैसे पावरफुल गुरु की ऐशो आराम की जांच चल रही है। धार्मिक दंगों की शुरुआत हो चुकी है। इससे पहले गुरु ग्रह की मिथुन स्थिति जून 2001 से जून 2002 में थी जिसमें गुजरात के गोधरा ( फरवरी 2002 ) के दंगे हुए थे। प्रत्येक 12 वर्ष बाद गुरु ग्रह के मिथुन राशि में पहुँचने के साथ ही उसकी धनु राशि पर सीधी दृष्टि पड़ते ही धार्मिक उन्माद की शुरुआत हो जाती है।

   सन 1990 के धार्मिक उन्माद के समय भी गुरु मिथुन राशि में था। मिथुन राशि यात्रा , यातायात व संचार की राशी है जो गुरु ग्रह  के शत्रु बुध ग्रह के अंतर्गत है. अत: इन सभी दंगों में यातायात (साबरमती ट्रेन -गोधरा ), रथ यात्राएं व नए जमाने में संचार ( मुज़फ्फरनगर दंगा -मोबाइल -फेसबुक वीडियो क्लिप ) का दुरूपयोग कर के दंगे आरम्भ किए गए।

   लेकिन इस बार शनि की भी दृष्टि धर्म भाव पर होने से मामला गंभीर है और धार्मिक फसादों से हानि की संभावना अत्यधिक है और सरकारी तंत्र पर शनि दृष्टि होने से दंगा नियंत्रण राजनीतिक कारणों से देरी से होने की संभावना है। अत: सभी सभ्य नागरिकों से यह आशा की जाती है कि इन ज्योतिषीय तथ्यों को ध्यान में रखते हुए संचार व सोशल मीडिया  को सावधानी से प्रयोग करें , अफवाहों पर ध्यान न दें और स्थिति को नियंत्रण में रखने में अपना योगदान दें। 

   रही बात नमो और भाजपा की तो सभी निष्पक्ष ज्योतिषी इस बात पर एक मत हैं कि प्रधानमंत्री बनने की उनकी राह थोड़ी कठिन  है और भाजपा के कार्यकाल में पड़ोसी मुल्कों से ( भाजपा की मिथुन लग्न और वृश्चिक राशि की वजह से) तनातनी व युद्ध की संभावना भी ज्यादा रहती है।

Go Back

Astrological Review of Bihar Politics

बिहार की चुनावी राजनीति का ज्योतिषीय विवेचन 

 

सन 2004 से 2012 तक मेरी पोस्टिंग पावरग्रिड में बिहार राज्य में ही थी .मुझे इस दौरान बिहार राज्य और इसके निवासियों को नज़दीक से जानने का मौक़ा मिला . मेरे प्रवास में पहला साल लालू राज , दूसरा साल कांग्रेस का राज्यपाल(बूटासिंह) शासन और उसके बाद से नीतीश कुमार का शासन था .

बिहार में सरकारी कार्यों की गति विभिन्न कारणों से धीमी रहने के कारण मुझे ज्योतिष के बहुत सारे प्रयोग करने का समय मिल सका .वैसे तो मुझे दरभंगा में लोग पावरग्रिड प्रोजेक्ट इंचार्ज के रूप में ही जानते थे लेकिन कुछ लोग ज्योतिष में रूचि रखने के लिए भी मुझे जानते थे.ऐसे मित्रों की फरमाइश पर पहले मैंने बिहार के बारे में ज्योतिषीय भविष्यवाणी करने के लिए एक उचित गणितीय आधार की खोज आरम्भ की .और उसके बाद जब मैंने लालू जी की सरकार जाने की भविष्यवाणी की तो उन दिनों बिहार वासियों को यह यकीन करना मुश्किल था कि लालू जी की सत्ता 15 साल बाद वाकई उखड़ने वाली है.

चुनाव की भविष्यवाणियों के लिए ज्योतिषी ज्यादातर प्रमुख नेताओं की जन्मकुंडलियों को आधार बना कर चलते हैं और ऐसी भविष्यवाणियाँ अक्सर गलत होती हैं क्योंकि असली जन्मतिथि नेता कभी जाहिर नहीं होने देते हैं और अगर पता लग भी जाए तो उस पर बाद में भ्रम फैला कर दो तीन जन्मतिथि प्रचारित कर दी जाती हैं . यही समस्या दलों की कुंडली बनाने में भी अक्सर आती है. अत: इनके आधार पर सही भविष्यवाणी करना बेकार था और मैं एक स्पष्ट आधार की खोज में था .

अंत में मैंने गोचर आधारित भविष्यवाणी पर ध्यान केन्द्रित किया जिसमें राशि को आधार मानकर भविष्यवाणी की जाती है. अब मेरा पहला लक्ष्य लक्षणों के आधार पर बिहार राज्य के लिए एक प्रभाव राशि, बारह राशियों में से चुनना था .

बिहार की प्रमुख भौगोलिक व राजनैतिक विशेषताएं मेरे अनुसार इस प्रकार हैं :

1. अनेक नदियों का हिमालय नेपाल से आके गंगा में मिलना , बिहार को जल प्रचुर व बाढ़ ग्रस्त राज्य बनाता है.
2. आबादी का अधिक घनत्व व अधिक जन्मदर
3. बिहार के निवासी ऊपर से शांत व अन्दर से उद्वेलित रहते हैं .
4. अपने राज्य में भौगोलिक व राजनैतिक कारणों से पिछडापन भोगने को अभिशप्त बिहार निवासियों में असीम ऊर्जा छुपी रहती है जो बिहार से बाहर जाने पर मुखर हो जाती है और इनकी विशेष प्रगति का कारण बनती है. यह भूमि में छिपे पेट्रोलियम या कोयले से मिलता उदाहरण है जो बाहर जाने पर महँगा बिकता है.
5. यह विशेष प्रतिभा बिहार में अधिक अपराध दर व माफिया के फैलाव में भी दिखता है .

उपर्युक्त आधार पर 12 राशियों में से एक राशि का चुनाव मुझे करना था . 12 राशियों में से 3 राशियाँ कर्क, वृश्चिक व मीन ही जलीय राशियाँ हैं जिनमें से मीन को समुद्री राशि माना जाता है . बिहार समुद्र के पास न होने से मेरा चुनाव सिर्फ कर्क व वृश्चिक के बीच रह गया .

कर्क राशि को चौथे भाव सुख, सम्पन्नता की राशि व इसके स्वामी चंद्रमा को शान्ति व सुख का कारक माना जाता है.

इसके विपरीत वृश्चिक राशि आठवीं राशि है जो की भूमिगत ऊर्जा संपन्न ( रहस्यमय) , शोभारहित व गोपनीय मानी जाती है. इस राशि में सुख का ग्रह चन्द्रमा नीच का माना जाता है. इसका स्वामी ग्रह मंगल ऊर्जा , क्रोध , अपराध व सुरक्षा , बल पूर्वक कार्य कराने वाला ग्रह माना जाता है.

अत: निर्विवाद रूप से वृश्चिक राशि को बिहार राज्य की प्रभाव राशि मान सकते हैं . एक बार राशि निर्धारण हो जाने पर इस राशि से गुरु व शनि ग्रहों की स्थिति के अनुसार राज्य व इसकी सत्ता परिवर्तन की भविष्यवाणी भी की जा सकती है.

यहाँ एक रोचक बात मैंने पायी कि चीन की राशि भी वृश्चिक है क्योंकि ऊपर लिखे कई कारण जैसे रहस्यमयता , बाढ़ , भूकंप , बीमारियाँ , गरीबी, बड़ी आबादी, बेरोजगारी व बलपूर्वक शासन (कम्युनिस्ट) चीन के साथ भी लागू होते है. चीन व बिहार में काफी समानताएँ आप भी खोज सकते हैं .

गोचर के आधार पर भविष्यवाणी :

शनि ग्रह सूर्य के चारो ओर 30 साल में एक चक्कर लगाता है और 12 राशियों का भ्रमण पूरा करता है . इस प्रकार यह एक राशि में करीब ढाई साल रहता है . इसके प्रवेश से ठीक पहले अनेकों परिवर्तनों की शुरुआत हो जाती है जो कम से कम ढाई साल या उससे अधिक समय तक प्रभावी रहते हैं .

किसी भी राशि से शनि चौथे व आठवें स्थान पर होने से ढैया यानी ढाई साल उस राशी के लिए उथलपुथल भरे होते हैं .

इसके अलावा राशि से एक पहली राशि से आरम्भ कर राशि से आगे वाली राशि तक शनि का ( पूर्व,मध्य व पश्चात) 3 राशियों का लगातार शनि भ्रमण जन सामान्य में साढ़े साती के नाम से प्रचलित है क्योंकि इसमें साढ़े सात साल लगते हैं . साढ़े साती का समय किसी भी राशि के लिए आमूल चूल परिवर्तन कारक होता है और इस समय से पहले और बाद के समय में ज़मीन आसमान का अंतर होता है.

 

वृश्चिक राशि की ढैय्या व साढ़े साती

उपर्युक्त नियम के आधार पर शनि का कुंभ व मिथुन राशि में भ्रमण ढैय्या और तुला , वृश्चिक व धनु में भ्रमण साढ़े साती का समय वृश्चिक राशि के लिए होगा जो बिहार के लिए भी लागू होगा .

शनि ग्रह की सन 2000 से विभिन्न राशियों में प्रवेश की तिथि इस प्रकार है :

1 . वृष में प्रवेश जून 2000 से

2. मिथुन में प्रवेश अप्रैल 2003 से

3 कर्क में प्रवेश सितम्बर 2004

4. सिंह में प्रवेश नवम्बर 2006

5 कन्या में प्रवेश सितम्बर 2009

6. तुला में प्रवेश नवंबर 2011

7. वृश्चिक में प्रवेश नवम्बर 2014 से

8. धनु में प्रवेश जनवरी 2017 से

9. मकर में प्रवेश जनवरी 2020 से

आप देख सकते हैं कि बिहार की ढैय्या शनि के मिथुन राशि प्रवेश के साथ सन अप्रैल 2003 से सितम्बर 2004 और पुन: 13 जनवरी 2005 से 26 मई 2005 तक थी . यह समय अष्टम शनि का होने से, जिसमें शनि की तीसरी दृष्टि दशम स्थान पर होती है , बिहार के चुनाव में शासक बदलने की गारंटी थी .

बिहार में लालू प्रसाद यादव की सत्ता शनि की मिथुन राशि की ढैय्या के दौरान गयी थी जब शनि वक्री गति से पुन: मिथुन राशि में 13 जनवरी 2005 से 26 मई 2005 तक था . बिहार विधान सभा के चुनाव फरवरी 2005 में कराए गए थे जिसमें लालू को बहुमत नहीं मिला और न ही किसी ने उनका समर्थन किया और लालू को सत्ता छोडनी पड़ी .

मेरी लालू के हटने की सफल भविष्यवाणी का मुख्य आधार सन 2005 के चुनाव के समय शनि का मिथुन राशि में होना था, जो की आठवाँ गोचर होने से सत्ता परिवर्तन की गारंटी देता है.

इसके बाद शनि का गोचर 9 , 10 व 11वें शुभ स्थानों में होने से सत्तारूढ़ दल को निष्कंटक राज्य व अभूतपूर्व बहुमत भी मिला.

लेकिन 15 नवम्बर 2011 से बिहार , शनि के तुला राशि में प्रवेश के साथ ही साढ़े साती के प्रभाव में आ चुका है। साढ़े साती के पहले चरण में जो नवम्बर 2014 तक है , इसमें परिवार में कलह ( सत्तारूढ़ दलों की आपस में कलह ) , जनता व सरकार के बीच झडपें व लोकप्रियता में कमी का फल मिलेगा, लोकसभा चुनाव के बाद इसमें और तेजी आयेगी .

साढ़े साती के दूसरे चरण , जो शनि के वृश्चिक प्रवेश नवम्बर 2014 से जनवरी 2017 तक होगा , इसमें शनि की दशम दृष्टि दशम राज्य स्थान पर पुन: होने से अष्टम शनि ही की तरह यानी फरवरी 2005 की तरह बिहार में पुन: सत्ता परिवर्तन का योग बन रहा है . बिहार विधान सभा के चुनाव सन 2015 के अंत में होने हैं .

बिहार सन 2011 -2019 के बीच साढ़े साती के प्रभाव में है अत: इस अवधि में बिहार में आमूल चूल परिवर्तन दिखने की संभावना है . आप भी इन संभावनाओं के बारे में अनुमान लगा सकते हैं , इसके लिए मैं आपको एक प्रमाण देता हूँ .

शनि 30 साल बाद सूर्य का एक चक्कर पूरा करता है इसलिए 30 बरस बाद पुन: पिछला इतिहास नई पीढ़ी के साथ दुहराया जाता है. बिहार की पिछली साढ़े साती 30 बरस पहले अक्टूबर 1982 से दिसंबर 1990 तक थी , जिसमें कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी की सत्ता जो बिहार से गयी तो वह अभी तक दुबारा किसी भी राष्ट्रीय पार्टी को नहीं मिली है.

साढ़े साती में शनि उलटफेर के लिए जाना जाता है , इसलिए आप भी समझ सकते हैं कि क्षेत्रीय राजनीति से वापस राष्ट्रीय पार्टी  के हाथ में बिहार की सत्ता पहुँचने की अवधि  इसी साढ़े साती में है.

लगे हाथों आपको एक अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण दे कर अपनी बात को मैं विराम देता हूँ .

मैंने ऊपर लिखा है कि चीन की भी वृश्चिक राशि है . अत: साढ़े साती के वही प्रभाव चीन पर भी लागू होंगे . चीन अक्टूबर 1982 से दिसंबर 1990 तक एक बड़ी उथलपुथल से गुजरा जिसमें 1989 का तियान्मैन चौक नरसंहार  भी शामिल था और जिसे बड़ी सख्ती से कुचल तो दिया गया लेकिन उसी के कारण चीन में  आर्थिक उदारी व वैश्वीकरण की शुरुआत मानी जाती है. इन परिवर्तनों को स्वीकार करने के कारण ही अगले तीस साल में चीन विश्व की आर्थिक महाशक्ति बन सका .

सन 2011 -2019 के बीच चीन पुन: साढ़े साती की गिरफ्त में है, पर इस बार वह महत्वाकांक्षा की वजह से पतन की ओर है और इसके लक्षण अभी से दिखने लगे हैं : पड़ोसी देशों भारत , जापान , वियतनाम और अमेरिका आदि से कलह की शुरुआत हो चुकी है और 2020 के बाद की चीन की स्थिति में अब से ज़मीन आसमान का अंतर आपको मिलेगा क्योंकि उत्थान के बाद पतन ही होता है .

Go Back

Ram Vanvaas Live Broadcast on Indian TV

त्रेता युग से राम वनवास का टीवी पर लाइव  प्रसारण 

 जब आप बरसों से देश से गरीबी हटने की कल्पना को सच माने बैठे हैं तो मुझ शेखचिल्ली के साथ यह कल्पना भी कर डालिए कि जैसे द्वापर में संजय ने धृतराष्ट्र को महाभारत का आँखों देखा हाल सुनाया था वैसे ही त्रेता में भी दूरदर्शन था । सबूत के तौर पर राम वनवास के कुछ दृश्य आप को दिखाता हूं :

 दृश्य 1

  कल राम का राजतिलक है। सभी चैनल, सरकारी चैनल का प्रसारण रिले कर रहे है। कर नहीं रहे हैं, उन्हें करना पड़ रहा है। सीधे प्रसारण का अधिकार और किसी के पास नहीं है। सुबह से शहनाई बज रही है, राम के बचपन से आज तक की बार-बार फुटेज दिखाई जा चुकी है। कार्यक्रमों में कोई सनसनी नहीं है, व्यूअरशिप कम है, इसलिए विज्ञापन भी नहीं है। अचानक रात बारह बजे सभी चैनल जाग जाते हैं। हर चैनल पर एक ही ब्रेकिंग न्यूज है - राम को चौदह बरस का वनवास। सारी अयोध्या सोते से जाग गई है। पान और चाय की दुकानें खुल गई हैं। ढाबे सज गए है। सुनसान गलियाँ ऐसे ही जीवंत हो गई हैं जैसे प्रभु से वरदान पाया कोई भक्त।

 कुछ चैनल सनसनीखेज खुलासा कर, सनसनी वैसे ही फैला रहे हैं जैसे असुर अपनी संसकृति फैलाते है। देखिए सनसनीखेज खुलासा, कैसे एक सौतेली माँ ने किया अत्याचार। जो बेटा उसे अपनी माँ से बढ़कर मानता था उसी माँ ने दिया उसे चौदह बरस का वनवास। आप जाइएगा नहीं, देखते रहिएगा। अयोध्या के इतिहास में ऐसा न कभी घटा और न कभी घटेगा। अपने पुत्र भरत के लिए ऐशो-आराम और वे राम जो कल राजा बनने जा रहे थे, उनके लिए चौदह बरस का वनवास। हम आपको दिखाने जा रहे हैं सनसनीखेज खुलासा कि कैसे हुआ राम को यह वनवास। जाइएगा नहीं, ब्रेक के बाद हम आपको दिखाएँगे कैकेयी की वो चाल जिसने पलट कर रख दी दशरथ की बाजी।'

 इसके बाद ब्रेक इतना लंबा होता है कि सनसनी का ब्ल्ड प्रेशर लो होने लगता है। इस ब्रेक में राम छाप दूध् से लेकर कैकेयी छाप सुरा तक के विज्ञापन अपना कमाल दिखाते हैं।

  दृश्य 2

  कुछ चैनल्स ने विशेषज्ञों को बुला लिया है। विशेषज्ञों का मुकाबला चल रहा है जो किसी डब्ल्यूडब्ल्यू एफ के दंगल से कम नही है। ऐसे मुकाबले आनंद देते हैं, इसलिए आप भी इस मुकाबले का आनंद लें।

 एक - हमारा दल मानता है कि ऐसा अयोध्या के इतिहास में पहले कभी घटा नहीं है।

 विशेषज्ञ दो - हमारा दल मानता है कि ऐसा अयोध्या में घटा है पर उसके प्रमाण नहीं मिलते हैं।

 विशेषज्ञ तीन - कब घटा है? आपके पास क्या प्रमाण हैं?

विशेषज्ञ दो - जब भी घटा है, घटा है। प्रमाण समय आने पर देंगे।

विशेषज्ञ एक - मैं कहता हूँ नहीं घटा है...

 विशेषज्ञ दो - मैं कहता हूँ घटा है।

 और इसके बाद खूब मैं मैं चलती है तो संचालक तीसरे की ओर रुख कर के कहता है - आपका दल इस बारे में क्या कहता है?

 - हमारा दल इंतजार करेगा कि कौन सत्ता में आता है, राम या भरत, जिसे हमारे दल की आवश्यकता होगी। अपनी आत्मा की आवाज हम तब ही सुनेंगे और उचित समय पर उचित फैसला लेंगे।

  दृश्य 3

  इस बीच एक और ब्रेकिंग न्यूज आती है - अभी-अभी हमें समाचार मिला है कि सीता के लिए वनवास के वस्त्र रात को एक दुकान खुलवा कर लिए गए हैं। हमारे संवाददाता इस समय दुकान के बाहर मौजूद हैं, चलिए हम उस दुकानदार से बात करते हैं जिसके यहाँ से यह वस्त्र लिए गए हैं।

 - आपका नाम?

 - मेरा नाम हरीशचंदर है जी

 - आप क्या करते हैं

 - जी, मैं रिषी-मुनियों को कपड़े बेचता हूँ।

 - आपकी दुकान पर केवल रिषी-मुनि ही कपड़े लेने आते हैं?

 - हाँ जी।

 - और कोई नहीं आता?

 - न जी।

 - और कोई क्यों नहीं आता?

 - पता नहीं जी।

 - आप झूठ बोल रहे हैं, आपको सब पता है।

 - पता नहीं जी।

 - आपको पता है, आपके यहाँ से ही कपड़े गए हैं किसी महिला के लिए । हमारे पास इसकी वीडियो है, हमें सब पता है,

 - जब आपको सब पता है तो मुझसे क्यों पूछ रहे हो?

 तो आपने देखा महलों का आतंक। हम अभी कुछ देर में आपको वह वीडियो दिखाने जा रहे हैं जो खुलासा कर देगी कि वो कपड़े सीता के लिए ही गए हैं। हमारी टीम उस डिजाइनर की खोज कर रही हैं और उस प्रसाधन केंद्र का भी पता कर रही है जहाँ सीता जी वनवास के लिए सजने गई थीं।

आप हमें एसएमएस करें कि क्या राम अकेले वनवास जाएँगे ? यदि आपका जवाब हाँ है तो हाँ लिखें, न है तो न लिखें और कुछ भी जवाब न हो तो भी आप लिखें 'कुछ नहीं' । हमारे चैनल ने पहली बार ऐसे लोगों को भी मौका दिया है जिनका जवाब 'कुछ नहीं' हो सकता है।

 दृश्य 4

  एक धर्मिक चैनल ने गुरु वसिष्ठ के विशिष्ट चेले, उनके विशिष्ट विरोधी तथा कुछ पंडितों का पैनल बनाया हुआ है। पोथियाँ खुली हुई हैं, ग्रहों की स्थिति बाँची जा रही है, गणनाएँ जारी हैं तथा अनिश्चित वातावरण में कुछ भी निश्चित कहने से बचा जा रहा है। अलग-अलग चेहरे अलग-अलग अंदाज में दिख रहे हैं। कुछ इस अंदाज में दिखाई दे रहे हैं कि अरे, ये क्या हो गया, कुछ इस अंदाज में हैं कि हमने तो पहले ही कहा था और ये तो होना ही था तथा कुछ इस अंदाज में हैं कि देखें भाग्य में और क्या-क्या होना है। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न ये है कि गुरु वसिष्ठ ने मुहूर्त निकालते समय ग्रहों की गणना कैसे गलत कर दी। कुछ गुरु की मीन-मेख निकाल रहे हैं, कुछ करम गति टारे नहीं टरे के सिद्धांत की व्याख्या कर रहे हैं और कुछ कोई नृप होय हमें का हानी से निस्पृह हैं और कुछ जुगाड़ यंत्र को साध आगामी शासन में अपनी घुसपैठ बनाने के वचन बोल रहे हैं।

 क्या चल रहा है, इसे देखने को अभिशप्त जनता आप भी देखें।

 प्रश्नकर्ता - सुना है राम का राजतिलक रुक गया है और वे वनवास जा रहे हैं।

ज्योतिषचार्य - ये सब ग्रहों का खेल है, समय बहुत बलवान है।

 - कौन-से ग्रह क्या खेल खेल रहे हैं?

- राम और दशरथ के ग्रह टकरा गए हैं। राहु-केतु प्रबल हो गए हैं। समय शुभ नहीं है।

 - पर कल तो आपने राजतिलक के लिए समय को शुभ बताया था, अति शुभ बताया था।

- ग्रहों की चाल बदलती रहती है। समय बहुत बलवान होता है। करम गति टारे नहीं टरती है।

 - अब भविष्य में क्या होगा?

 - समय शुभ नहीं है।

 - यदि कैकेयी ने अपने वचन वापस ले लिए या फिर दशरथ वचन से मुकर गए?

- भविष्य के गर्भ में बहुत कुछ छिपा रहता है। समय शुभ हो सकता है। माता कौशल्या यज्ञ करवा रही हैं, मंत्रोच्चार हो रहे हैं। तांत्रिक व्यस्त हैं। समय बदल सकता है।

 - नहीं भी बदल सकता है क्या?

 - नहीं भी बदल सकता है। पता नहीं कैकेयी क्या करवा रही हैं।

 धर्मिक चैनल की इस चर्चा में सभी गुणी और ज्ञानी जन अपने-अपने धर्म की व्याख्या कर रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण क्षण में प्रजा के प्रति धर्म की चिंता कहाँ? प्रजा तो वैसे ही सन्नाटे में है।

 दृश्य 5

  कुछ कैमरामैन कैकेयी के कोपभवन के बाहर तक पहुँच गए हैं। बाहर सुरक्षाकर्मी खड़े हैं। दशरथ तक पहुँचना नामुमकिन है। चलिए हम सरकारी प्रवक्ता सुमंत जी से पूछते हैं - सुमंत जी, आप तो राजा दशरथ के करीबी हैं, आप बताएँ इस समय राजा दशरथ को क्या लग रहा है?

 सुमंत सोच की मुद्रा बनाते हुए और आवाज को गंभीर करते हुए - यह बहुत असमंजस का काल है... सभी असंमजस में हैं... असमंजस के इस काल में, मेरे विचार से इस समय महाराज को यह लग रहा है कि वे दशरथ क्यों हैं।

 -और उनके पास बैठी रानी कैकेयी को क्या लग रहा है?

- वे भी असंमजस में हैं और रानी कैकेयी को लग रहा है, कि वे कैकेयी क्यों हैं?

- और आपको सुमंत जी?

 - मुझे, मैं तो बहुत असंमजस में हूँ... मैं राजा दशरथ और रानी कैकेयी का नजदीकी हूँ, इसलिए मुझे भी लगना ही चाहिए कि मैं सुमंत क्यों हूँ?

देखा आपने यह सनसनीखेज खुलासा, सुमंत तक को पता नहीं है कि वे सुमंत क्यों हैं। राम वनवास की अचानक खबर ने अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। सभी असंमजस में हैं। कहीं आपातकाल...

 इस बीच कुछ कैमरे राजा जनक के महल तक भी पहुँच गए हैं। महल के द्वार बंद हैं। कोई प्रवक्ता तक नहीं है कुछ कहने के लिए। चारों ओर असंमंजस ही असंमजस है।

 कुछ चैनल भरत की पहली बाइट लेने के लिए उन्हें ढूँढ़ रहे हैं, पर भरत पर तो सुरक्षा घेरा कस चुका है। उनका कुछ भी कहना अयोध्या में...

  

मित्रो, ऐसे ही दृश्य संख्या 6, 7, 8 आदि आदि अनादि हैं - हरि अनंत हरि कथा अनंता की तरह। मैं उनका वर्णन अभी नहीं कर रहा हूँ क्योंकि मुझे पूरा विश्वास है कि उन्हें देखने और सुनने के बाद आप भी असमंजस में पड़ जाएँगे और पगला कर कहेंगे - मुझे लग रहा है कि मैं, मैं क्यों हूँ। बोल वनवासी राम की जय!

 

(By Prem Janmejay at Hindisamay) 

 

Go Back

3 Blog Posts