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Blog posts September 2014

Lessons from Natural Disasters

 

कुदरती क़हर  से जूझने के फायदे 

पिछले साल उत्तरखंड और इस साल कश्मीर की बाढ़ में अपार जन धन की हानि हुई है .कुदरती हादसों से नुक्सान होता है लेकिन उनसे कुछ फायदे भी होते है . मैं इस बारे में अपना अनुभव बांटना चाहूंगा . प्राकृतिक आपदाएं बता कर नहीं आतीं हैं . लेकिन इनसे जूझ कर निकलने वाले लोगों के व्यक्तित्व में एक सकारात्मक बदलाव थोड़े ही समय में आ जाता है जो कि किसी भी और ट्रेनिंग से और पैसे खर्च कर भी नहीं आ सकते . इन बदलावों में ईश्वर में आस्था सर्वोपरि है . इसके अलावा धैर्य , अभावों में रहने और जूझने की क्षमता , समय की उलटफेर करने की सामर्थ्य पर विश्वास आदि अनेक बदलाव मनुष्य के  व्यक्तित्व में धनात्मक परिवर्तन लाते हैं .

जनवरी 2004 में मेरी दरभंगा सबस्टेशन बनाने के लिए पोस्टिंग हुई थी . पावरग्रिड की परम्परा के तहत किसी भी तरह से मई , जून तक मिट्टी भर कर सिविल वर्क कराने का दबाव था , पर साइट पर परिस्थितियां उचित न होने की वजह से मैंने काम आरम्भ नहीं होने दिया . इसका एक कारण यह भी था कि मुझे कुछ स्थानीय लोगों से पता चला था कि लोकल ठेकेदार मई , जून में अधूरा काम करते हैं और बाढ़ में सब कुछ बहा हुआ दिखाकर पूरे बिल का दावा करते हैं . इससे फायदा यह हुआ कि जुलाई की अभूतपूर्व बाढ़ की वजह से सबस्टेशन का ग्राउंड लेवल 2 गुना बढ़ा कर और ऊंचा किया गया जिससे भविष्य में बाढ़ से बिजलीघर बंद न हो .

10 जुलाई 2004 को मैं दरभंगा से अपने बॉस से मिलने मुजफ्फरपुर गया . बॉस को बाढ़ की  भनक कुछ पहले ही मिल गयी थी सो वे पहले ही ट्रैन से कलकत्ता निकल गए थे . वहां से लौटते हुए शाम को मैंने देखा कि बाढ़ का पानी हाईवे के ऊपर से बह रहा था . मैंने ड्राइवर से पूछा तो उसने कहा कि इतना तो अक्सर यहां होता रहता है .

फिर भी मैंने घर  आने पर रात में दूकान पर जा कर कुछ आवश्यक खरीदारी की और सो गया . सुबह 5 बजे शोरगुल से नींद खुली तो पहली मंजिल पर अपने घर से मैंने नीचे देखा कि मकान मालिक के घर , भूतल पर 3 फ़ीट पानी भर चुका था . शाम होते होते शहर में 6 से 8 फ़ीट पानी भर गया था . दरभंगा शहर को बाहर से जोड़ने वाली 4 मुख्य सड़कों की एप्रोच रोड बह चुकी थीं और कई पुलों के दोनों ओर नदी बह रही थी . रेल लाइन  के ऊपर से पानी बहने के कारण सभी ट्रेन बंद की जा चुकी थीं . बिजली सुबह से ही हमेशा के लिए बंद हो गयी थी . होटल, दुकाने भी बंद हो चुके थे और बाहर से आये लोगों को होटल वालों ने जाने को कह दिया था . बैंक , एटी एम , सरकारी ऑफिस , अस्पताल आदि सभी बंद थे .

ऑफिस की जीप ऊँचे स्थान पर खड़ी करके , ड्राइवर जो सीतामढी का रहने वाला था , वह मेरे घर पर रुक गया . उसके बाद तो अगले 7-8 दिन पूरी प्राकृतिक दिनचर्या थी . मकानमालिक के पास एक जनरेटर था जो पानी की मोटर चलाने के काम आता था . कहीं आने जाने की कोई आवश्यकता नहीं थी . घर में खाने के लिए दाल, चावल,आटा आदि था , एक गैस सिलिंडर भी था ,इसलिए सुबह शाम दोनों लोग मिलकर खाना बना खा लेते थे . एक ट्रांजिस्टर से पटना आकाशवाणी से बाढ़ की खबर सुन लेते थे , बाद में नाव से अखबार आना भी शुरू हो गया .

मेरा ड्राइवर ज्यादा पढ़ा न होने से दिनभर बोर हो कर मोहल्ले की ख़बरें इकठ्ठा करने चल देता था . पर मेरे पास अपनी ढेर सारी किताबों को पढ़ने के लिए काफी वक्त था . ज्योतिष की कुछ मौलिक खोजें मैंने उसी दौरान कीं और उन्हें लिख के भी रख लिया जो अब भी काम आतीं हैं .

सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि ,जो ऑफिस वाले पटना से रोज  कार्य प्रगति जानने के लिए   5-10  बार फोन करते थे, उन्होंने अगले दस दिन में एक बार भी फोन नहीं किया जबकि सबको पता था कि उस इलाके में 8-10 कर्मचारी सपरिवार फंसे हुए थे . पटना से दिन में एक दो बार एयरफोर्स के हेलीकाप्टर ऊपर चक्कर लगा के चले जाते थे . हमारे एक डीजीएम बाढ़ से पहले पटना ऑफिस के काम से गए हुए थे , वो दरभंगा में अपने परिवार के पास आना चाहते थे . लेकिन पावरग्रिड के सर्वोच्च स्तर के अधिकारियों ने भी अपने तरफ से कुछ नहीं किया ,जो बिहार के मंत्रियों के साथ सबस्टेशनों के शिलान्यास के चक्कर में दिन रात उठते बैठते थे. थक हार कर वे स्वयं पटना एयरफोर्स स्टेशन  पहुंचे और अपनी व्यथा कथा वायु सेना अधिकारियों को बताकर  हेलीकाप्टर से दरभंगा पहुंचे .

करीब 10 दिन बाद मैं भी मुज़फ्फरपुर से ट्रेन पकड़ने के लिए घर से ड्राइवर के साथ निकला . करीब 10 किमी तक सड़क सिर्फ पैदल या मोटर साइकिल से चलने लायक थी .और उस पूरी सड़क पर हज़ारों विस्थापित लोग परिवार सहित रह रहे थे . बीच में डेढ़ दो किमी की दो बार ओवरलोडेड नाव की यात्रा के बाद बाढ़ वाले क्षेत्र से छुटकारा मिला .

मुजफ्फरपुर ऑफिस पहुंचने पर लोकल सहकर्मियों की प्रतिक्रिया थी कि आप तो बड़ी जल्दी छूट गए और आप को तो इतने दिन ऑफिस नहीं जाना पड़ा आदि . बाद में भी किसी मीटिंग में किसी बड़े अधिकारी ने मुझसे इस बारे में कभी कोई जिक्र तक नहीं किया . लेकिन इसका फायदा मुझे अगले 8 साल तक बिहार में रहने के दौरान मिलता रहा . जब भी किसी मीटिंग में बड़े अधिकारी , काम जल्दी करने और कर्मठता के उपदेश देना शुरू करते तो मैं भी उन्हें उनकी और सरकार की उदासीनता का उदाहरण तुरंत याद दिला देता था और वे निरुत्तर हो जाते थे . 

प्राकृतिक आपदाओं से मिलने वाली सीख

1. अगर आप किसी आपदा के लिए प्लान करके रहते हैं , तो या तो आप के साथ वह घटित नहीं होगी या घटित होने पर उसका आपके ऊपर ज्यादा दुष्प्रभाव नहीं पडेगा .

2. बुरे वक्त में आप कितने ही रसूख वाले लोगों या संघठन से जुड़े हों , वे आपके किसी काम नहीं आएँगे , सिर्फ आपकी अपनी बुद्धि , धैर्य ,स्वास्थ्य , आत्मविश्वास , आस्था और साहस ही आपके काम आएगा . इसलिए अच्छे समय पर इन्हें बढ़ाने का प्रयत्न करना चाहिए और अपने घर परिवार के सदस्यों को भी इसके लिए तैयार करना चाहिए न कि उन्हें सुविधाओं का गुलाम बनने देना चाहिए. जिस दिन हेलीकॉप्टर आपको रस्से से लटका कर निकालेगा या 10 किमी पैदल चलने की नौबत आएगी , उस दिन आपका स्वास्थ्य ही काम आएगा , होंडा सिटी नहीं.  

3. ज्योतिष के अनुसार ,भयंकर आपदाएं शनि की स्वीकृति के बिना घटित हो नहीं सकती हैं और इस तरह की आपदा आने पर आपको शनि के शत्रु सूर्य और मंगल से मदद नहीं मिल सकती है . इसका अर्थ यह है कि अगर आप जल्दबाजी , चालाकी , अनैतिक उपायों से आपदा से छुटकारा पाने की कोशिश करेंगे तो आप और ज्यादा मुसीबत में फंस सकते हैं . सूर्य सरकारी तंत्र को नियंत्रित करता है इसलिए उससे भी आपको तुरंत मदद मिलना संभव नहीं है . शनै: शनै : आने वाला शनि जाता भी धीरे धीरे ही है , इसलिए कम से कम अगले 3-4 दिन तक यह मान कर चलना चाहिए कि हालात में सुधार संभव नहीं होगा और वर्तमान स्थिति को जितने धैर्य से काट सकें उतना ही ठीक होगा .

4. सबसे बड़ी सीख इन आपदाओं से यह मिलती है कि व्यक्ति चाहे जितने संसाधन इकठ्ठे कर ले , उसके अस्तित्व को मिटाने में समय को पल भर भी नहीं लगता . इसलिए अनैतिक तरीकों से माया इकठ्ठी करने का कोई अर्थ नहीं रह जाता है .

उस समय का ज्यादा मीडिया कवरेज मुझे नहीं मिला पर  The Hindu की रिपोर्ट आप यहां पढ़ सकते हैं : http://www.thehindu.com/2004/07/14/stories/2004071405431200.htm

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Narendra Modi Was AMU Founder Sir Saiyyad Ahmed Khan !

नरेंद्र  मोदी पिछले जन्म में कट्टर मुस्लिम थे !  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले जन्म में कट्टर मुस्लिम थे। उनका नाम था सर सैय्यद अहमद खान। जी हां, वही सर सैय्यद अहमद जिन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की स्थापना की थी।

पिछले जन्म के सर सैय्यद अहमद और इस जन्म के नरेन्द्र मोदी की शक्ल-सूरत, दाढ़ी और आंखें ही एक जैसी नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन की घटनाएं भी  चौंकाने  वाली हद तक एक जैसी हैं। यह दावा किसी सिरफिरे ने नहीं किया है, बल्कि अमरीका में सैन फ्रांसिस्को स्थित इंस्टीटयूट फॉर दी इंटीग्रेशन ऑफ साइंस इन्टयूशन एण्ड रिसर्च (आईआईएसआईएस) http://tinyurl.com/q47jv9a ने किया है।

इस संस्था ने पूरी दुनिया में अब तक करीब 20 हजार स्त्री, पुरूषों, बच्चों और यहां तक पशुओं के पुनर्जन्म पर भी अनेक अमरीकी विश्वविद्यालयों की मदद से शोध अध्ययन किए हैं और अनेक पुस्तकें भी प्रकाशित की हैं।

मोदी इस जन्म में अभूतपूर्व ढंग से पूरे भारत को अपने पक्ष में करने में कामयाब हुए और अगर पूर्व जन्म शोधवेत्ताओं का दावा सही माना जाए तो मुसलमानों में एकता की अलख जगाकर और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना करके उन्होंने पिछले जन्म में भी कुछ ऎसा ही काम किया था।

पूनर्जन्म के मामलों पर शोध के दौरान एक धर्म में दूसरे, एक देश से दूसरे देश में और स्त्री से पुरूष या पुरूष से स्त्री बनने के हजारों मामले इन विषयों पर शोध करने वालों ने पाए हैं और सबसे ज्यादा हैरत की बात यह पाई कि कोई व्यक्ति पिछले जन्म में जिस स्तर की प्रसिद्धि हासिल किए था, उसी स्तर की कामयाबी पा लेता था।

आइआइएसआइएस ने एक शोध में "पिछले जन्म में नरेन्द्र मोदी क्या थे", इस पर काम करने के लिए विश्वविख्यात पुनर्जन्म वैज्ञानिक केविन रियर्सन की सेवाएं ली। केविन ने मिस्र के अहतुन रे नामक माध्यम की सहायता से मालूम किया कि पिछले जन्म में नरेन्द्र मोदी ने सर सैय्यद अहमद खान के रूप में दुनिया भर के मुसलमानों की एकता, शैक्षिक प्रगति और अधिकारों के लिए काफी काम किया। वह तब भी दाढ़ी रखते थे और उनका स्वरूप आज जैसा ही हुआ करता था।

उल्लेखनीय है कि सर सैय्यद अहमद खान ने ही यह अभियान चलाया था कि मुसलमानों को आधुनिक तालीम दी जानी चाहिए और लड़कियों को भी पढ़ाना चाहिए। उन्होंने ही बाद में यह विचार दिया कि मुसलमानों का भला एक पृथक राष्ट्र के गठन के बाद ही मुमकिन है । यही विचार अंतत: पाकिस्तान के गठन का कारण बना।

आईआईएसआईएस अनेक नामचीन शोध वैज्ञानिकों और परा-मनोविश्लेषकों की मदद से विज्ञान, पूर्वाभास और पुनर्जन्म समेत अनेक विषयों पर पिछले तीस साल से काम कर रही है और पूरी दुनिया में इसके लाखों समर्थक हैं। यह जानकर हैरत नहीं होनी चाहिए कि हर देश, धर्म और काल खंड में मृत्यु के बाद की दुनिया, पूर्वजन्म और पुनर्जन्म को मानने वाले करोड़ों लोग मौजूद हैं।

सैकड़ों अन्य कामयाब लोगों के बारे में किए गए शोध-अध्ययनों में ऎसा ही धर्मातरण पाया गया है। सिर्फ एक बात सामान्य रही है कि कुदरत ने किसी को कुछ भी बना कर इस दुनिया में वापस भेजा, मगर उसकी पिछले जन्म की काबलियत नहीं छीनी।

पुनर्जन्म पर शोध के बाद अमरीकी मनोवैज्ञानिक और वर्जीनिया विश्वविद्यालय के विख्यात प्रोफेसर डा. इयान स्टीवेंसन ने लगभग 3 हजार पुनर्जन्मों की पुष्टि की। उनके इन अध्ययनों पर भी पुस्तकें छपीं। पुनर्जन्म के बारे में स्थापित और विश्व स्तर पर मान्य सिद्धांतों के मुताबिक पुन: जन्म लेने वालों में पूर्वजन्म की यादें, पूर्वजन्म की आदतें और दिलचस्पियां, शरीर पर पूर्व जन्म जैसे निशान, खानपान की रूचियां और सबसे बढ़कर पूर्वजन्म जैसा ही चेहरा मोहरा हुआ करता है।

आईआईएसआईएस के डा. वाल्टर सेमकिव ने भी दुनिया भर के मशहूर लोगों की पूर्व जन्म पर काम किया है। उनके मुताबिक भारतीय फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन पूर्व जन्म में भी बेहद कामयाब अभिनेता ही थे। तब वे शेक्सपियर नाटकों के अभिनेता एडविन बूथ थे। उनके उस जन्म में भी नाक-नक्श और आंखें पिछले जन्म में भी वर्तमान अमिताभ बच्चन जैसे ही थें। उनका एकमात्र उपलब्ध फोटो युवा अमिताभ जैसा ही लगता है।

डा. वालटर सेमकिव की पुस्तक में हिन्दुस्तान की अनेक हस्तियों के पूर्व जन्म पर शोध नतीजे दिए गए हैं। उनके मुताबिक भारत के राष्ट्रपति रहे मिसाइल मैन डॉ. अब्दुल कलाम पूर्व जन्म में भारत के मशहूर सेनानी टीपू सुलतान थे। उस रूप में भी वह अपने मौजूदा स्वरूप की खासियत अपनी खास हेयर स्टाइल जैसी पगड़ी ही पहना करते थे। पूर्व जन्म में भी टीपू एक तरह से मिसाइल मैन ही थे। युद्धों में पहली बार टीपू ने ही रॉकेटों का इस्तेमाल किया था।

पूरे संसार में हर देश और धर्मो को मानने वालों में पूर्वजन्म और पुनर्जन्म के मामले पाए जाते हैं। तिब्बतियों में तो दलाई लामा की तलाश ही इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर की जाती रही है। आईआईएसआईएस के संस्थापक तथा पेशे से एक चिकित्सक डा.वॉल्टर सेमकिव, एमडी शिक्षा प्राप्त हैं और दुनिया के सबसे विख्यात पुनर्जन्म विशेषज्ञ प्रोफेसर डा. इयान स्टीवेंसन के शिष्य हैं।

डा. वॉल्टर सेमकिव ने लगभग 4 हजार लोगों से सम्बंधित पुनर्जन्म के आंकड़ों का अध्ययन किया है और इस विषय पर अनेक किताबें लिखीं। उनकी पुस्तक "बोर्न अगेन" की अब तक 40 लाख प्रतियां अनेक भाषाओं में बिक चुकी हैं।

आईआईएसआईएस के अनेक शोध वैज्ञानिक यह मानते हैं कि पिछले जन्म के मुसलमानों की भलाई के लिए जद्दोजहद करने वाले सर सैय्यद अहमद खान भले ही नरेन्द्र मोदी के रूप में जन्म लें या देश के लिए सर्वस्व बलिदान करने वाले टीपू सुलतान डा. एपीजे अब्दुल कलाम के रूप में मगर कुदरत द्वारा उनके जीवन दर्शन और लक्ष्य पूर्व निर्धारित ही हैं।

पूर्वजन्म पर काम करने वाले वैज्ञानिकों की धारणा है कि धर्म और देश इंसानों के बनाए हैं और कुदरत इनको कतई नहीं मानती। इन्हीं शोध अध्ययनों के मुताबिक मशहूर पिछले जन्म में टीपू सुलतान के पिता सुलतान हैदर अली की मिलेट्री साज सामान और रॉकेटों में बहुत दिलचस्पी थी। उनके नाम नक्श, शैली और जीवन रूचियां भारत के अन्तरिक्ष वैज्ञानिक डा. विक्रम साराभाई से मिलती थी।

डा. साराभाई ने ही आरम्भ में पिछले जन्म के टीपू और इस जन्म में एक रक्षा वैज्ञानिक के रूप में जन्मे डा. कलाम की काबलियत को खूब बढ़ावा दिया। पुनर्जन्म शोध अध्ययनों में परा मनोवैज्ञानिकों ने पाया है कि अतिशय प्रतिभावान और कामयाब लोगों की पूर्वजन्म की क्षमताओं, कामयाबियों और जीवन स्तर में पुनर्जन्म में कमी नहीं आती।

पुनर्जन्म पर काम करने वाले वैज्ञानिक इसे भाग्य के कार्मिक सिद्धांत के जरिए समझाते हैं जिसके अनुसार पूर्व जन्म के कर्मो, प्रारब्ध को वर्तमान कर्मो के गुणांक के रूप में हासिल किया जाता है। इसके अनुसार, किसी भी जन्म में किया गया कर्म कभी भी नष्ट नहीं होता।

आईआईएसआईएस अध्ययनों के मुताबिक, पिछले जन्म में लालकिले से अंग्रेजों द्वारा बंदी बनाकर निर्वासित किए गए बहादुर शाह जफर ने ही भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के रूप में उसी लाल किले पर तिरंगा फहराने की ख्वाहिश पूरी की जहां से पिछले जन्म में उनको अपमानित करके निकाला गया था।

जवाहर लाल नेहरू और बहादुर शाह जफर दोनों की ही शकल सूरत बहुत मिलती थी। आईआईएसआईएस ने अनेक विश्वस्तरीय राजनेताओं, उद्योगपतियों और फिल्म साहित्य संगीत तथा खेल की दुनिया की हस्तियों के बारे में इसी प्रकार की दिलचस्प पूर्वजन्म सम्बन्धी खोजें की हैं।

कहीं भी यह नहीं पाया गया कि कोई भी विख्यात व्यक्ति इस जन्म में अपनी पिछले जन्म की भूमिकाओं से कोई अलग सोच रखता था। नरेन्द्र मोदी यदि वाकई ही पिछले जन्म में सर सैय्यद अहमद खान थे, तो क्या इस जन्म में मुसलमानों की तालीम और खुशहाली को बढ़ावा देने की कोई नई कोशिश करेंगें। ये तो वक्त ही बताएगा।

(Courtesy : Patrika.com 9/9/2014)

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