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Blog posts April 2013

Who is a Good Astrologer ?

The prime objective of this website is to clear the smoke and fog around Indian astrology ,which survives from the days of Mahabharata and Ramayana with a documented legacy of 4000 years. Nowhere in the world , we have such old uninterrupted research work in the field of astrology like our country  . So, all other astrological systems practiced abroad , can be finally traced to Indian system.

  Indian astrology suffers most in its birthplace India ,while it is revered abroad. There are many reasons ,some of which I narrated in my write-up "Sky High Expectations from Astrology ".

  But I have noticed that many in new generation ,are willing to give it time and energy to understand it rather than debunking it ,without even giving an hour to it. So,the things are changing slowly , but we have millions of convent educated young people ,who scoff merely at the word "Astrology or Prediction ". It was my destiny that I was always confronted by this class ,which was corporate manager like me or superior to me in hierarchy. Irony was that , after marathon discussions and proofs on astrology's utility, these very persons became overly interested in knowing their future. Some of articles posted in my blog and website are results of this interaction only.

   But I still keep on encountering such non-believers of astrology and I am too, more interested in them than the simple believers of astrology . These non-believers have simply not studied even a word of astrology but they can denounce it in 1000 words. Recently , I wrote an email to a Delhi based publishing agent for his fees to edit my soon to be published book on Astrology. I was surprised that without even asking for its content, he bluntly wrote that he would not take up the job as he had horrible experience with Astrology. It is like ,if my kin dies because of allopathy treatment , I start hating allopathy ,without understanding the actual reasons of wrong consultations.

 

   In my previous post , I wrote about fulfilling of a prediction ,where I had predicted repetition of similar breaking news after 4 months. The tragedy with  astrologer are many like :

  • If you predict good event , nobody bothers , because it is always expected. So, every astrologer gets his share of name and fame only by bad predictions , which circulate like wild fire. In 2002, I personally experienced it within my family ,when I was professionally challenged to come up with an accurate , time bound prediction with great impact. I did not like to predict a bad event ( of a death ,which I had calculated already ) but I was forced to predict it ,because astrology asks its practitioners to do it for the sake of its prestige.
  • And by God's grace ,it was fulfilled and it not only ended forever  all mud-slinging, debates and non-believing about astrology and astrologers , it also confirmed my status as a good astrologer within my relations , with no more doubts or questions, rather overbelief started. But,even in that prediction , a few persons raised an objection : why you predicted a bad event , it is against social etiquettes and so on...
  • So, as an astrologer , if you predict good event , it is least important, if you predict a very bad event but socially it may be bad and if you do not predict , you are fraud astrologer !!! No profession suffers such situations like an astrologer's.  

 Coming back to my recent prediction for repeat of 16th December 2012 like event during 13 April -31st May 2013, I received a similar response when a gentleman asked me why I predicted such bad event and then If I did , I should have averted it .

So, if your prediction is wrong ,you are a bad astrologer . But if you are right , then you should also stop it happening . And if you could do that also , then they will again say , it did not happen so you are a bad astrologer ....

So let me know what is the right option for a good astrologer ?  

  

 

 

 

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Fulfilling of Astrological Prediction on Delhi Child Rape on 19 April 2013

I had written a detailed astrological analysis story on 16 December 2012 Delhi rape case with title " JYOTISH YOGA FOR BREAKING NEWS "  on this website and  it had predicted that a similar incidence but  slightly smaller incidence will be repeated again during 13 April 2013 to 31 May 2013 , during Mars transit in Aries. 

The incidence has happened in Delhi again with a 5 year child victim and it is getting similar attention from President, PM, Sonia Gandhi , BJP and  Media...

 

Read Here  Full Article Jyotish  Yoga For Breaking News 

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बेचारा बड़ा आदमी

बेचारा वह बड़ा आदमी

उठने में सूरज से हारा ,
फिर भी हैंगोवर का मारा ,
कई किलोमीटर की जागिंग से भी
चढ़ा न उसके तन का पारा .

बेचारा वह बड़ा आदमी
पकड़ ट्रेड मिल खड़ा आदमी ,

पाले है सत्तर बीमारी ,
बीपी-शुगर पड़ रहे भारी ,
हलवा पूड़ी ,छप्पन भोग
छोड़ खाय उबली तरकारी .

बेचारा वह बड़ा आदमी ,
जीवन से भी डरा आदमी .

इनकम टैक्स वैट का चक्कर ,
कस्टम वालोँ से भी टक्कर
काले को सफ़ेद करने में
रोज़ चूर हो जाना थक कर .

दस पचड़ोँ में पड़ा आदमी ,
बेचारा वह बड़ा आदमी ,

बीवी की लम्बी फरमाईश ,
नापसंद बेटी की च्वाइस
जूते पर कब्जा कर बैठे
बेटे से भी जोर आजमाइश .

बस कॉलर का कड़ा आदमी
बेचारा वह बड़ा आदमी .

 

- ओम प्रकाश तिवारी

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भारतीय तांत्रिक ने दिखाया था थैचर को भविष्य

भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने बीबीसी से विशेष बातचीत में बताया कि थैचर तांत्रिक चंद्रास्वामी से भी मिली थीं,

जिन्होंने थैचर के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी बहुत पहले उनके सामने ही कर दी थी.इस बात का ज़िक्र नटवर ने अपनी किताब, “वॉकिंग विद लॉयन्स- टेल्स फ्रॉम अ डिप्लोमेटिक पास्ट” में भी किया है.

नटवर कहते हैं, “इंदिरा गांधी के सामने थैचर बहुत संभल कर बात करती थीं. दूसरे नेताओं का तो वह सफ़ाया कर देती थीं लेकिन इंदिरा जी के सामने संभल कर रहती थीं.”

जब थैचर कंजर्वेटिव पार्टी की पहली महिला अध्यक्ष बनीं तो नटवर सिंह लंदन में भारत के उप उच्चायुक्त थे.

 

उनका कहना है कि मार्गरेट थैचर बीसवीं सदी में चर्चिल के बाद ब्रिटेन की सबसे काबिल प्रधानमंत्री रही है.


चंद्रास्वामी और थैचर

 

नटवर सिंह 1975 में जब ब्रिटेन में भारत के उप उच्चायुक्त थे तो एक बार चंद्रास्वामी उन्हें मिलने इंडिया हाउस पहुंचे थे.

चंद्रास्वामी को स्वर्गीय यशपाल कपूर ने नटवर सिंह से बात करने की सलाह दी थी.बकौल नटवर सिंह, “उस वक्त वह 25-30 साल के थे. साधुओं के कपड़ों में पहुंचे चंद्रास्वामी अंग्रेजी का एक शब्द भी नहीं बोलना जानते थे.”

 

उन्हें आश्चर्य हुआ कि कुछ ही समय बाद चंद्रास्वामी ने थैचर से मुलाकात करवाने की गुहार लगवाई.थैचर छह महीने पहले ही कंजर्वेटिव पार्टी की नेता चुनी जा चुकी थीं.

 

बीबीसी से बातचीत में नटवर सिंह ने कहा, “चंद्रास्वामी को थैचर से मिलाने को लेकर मैं संशय में था. अगर चंद्रास्वामी नेखुद को उनके सामने मूर्ख साबित किया तो मैं और भी बड़ा मूर्ख नज़र आता.”

 

लेकिन जैसा कि उन्होंने अपनी किताब में भी लिखा है कि तत्कालीन विदेश मंत्री वाई बी के चव्हाण को ऐसी मुलाकात मेंकुछ अटपटा न लगने पर उन्होंने थैचर से मुलाकात का समय मांगा.

 

"चंद्रास्वामी को थैचर से मिलाने को लेकर मैं संशय में था. हालांकि वह अभी तक लौह महिला नहीं बनी थीं लेकिन अगरचंद्रास्वामी ने खुद को उनके सामने मूर्ख साबित किया तो? तो मैं और भी बड़ा मूर्ख नज़र आता."

 

लेकिन जैसा कि उन्होंने अपनी किताब में भी लिखा है कि तत्कालीन विदेश मंत्री वाई बी के चव्हाण को ऐसी मुलाकात मेंकुछ अटपटा न लगने पर उन्होंने थैचर से मुलाकात का समय मांगा.

 

नटवर कहते हैं कि हाउस ऑफ़ कॉमन्स के अपने छोटे से कमरे में विपक्ष की नेता ने मेरी बात सुनी और कहा, “उपउच्चायुक्त जी अगर आपको लगता है कि मुझे मिलना चाहिए तो मैं मिलूंगी. लेकिन वह मुझसे मिलना क्यों चाहते हैं”

नटवर ने कहा कि वह चंद्रास्वामी खुद उन्हें बताएंगे तो उन्होंने अगले हफ़्ते, ‘सिर्फ़ दस मिनट’, मिलने का वक्त दिया.

यह ख़बर सुनकर चंद्रास्वामी की खुशी का ठिकाना न रहा. नटवर सिंह ने उन्हें चेताया कि कुछ मूर्खतापूर्ण न करें.नटवर चंद्रास्वामी की टिप्पणी याद करते हैं, उन्होंने कहा था, “चिंता मत करिए.”

 

थैचर से मिलने जाते हुए चंद्रास्वामी पूरे साधु भेस में थे. सर पर बड़ा तिलक, गले में रुद्राक्ष की कई मालाएं और हाथ में लाठी.

 

परिचय के बाद थैचर ने पूछा, “आप मुझसे क्यों मिलना चाहते थे?”

 

चंद्रास्वामी ने हिंदी में जवाब दिया, जिसका नटवर सिंह ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया, “इन्हें कहिए कि जल्द ही पताचल जाएगा.”

 

चंद्रास्वामी बिल्कुल भी जल्दी में नहीं लग रहे थे.

  

उन्होंने एक कागज़ मंगवाया, उस पर ऊपर से नीचे तक और दाएं से बाएं तक लकीरें खींच दीं.इसके बाद चंद्रास्वामी ने थैचर को कागज़ के पांच टुकड़े दिए और सभी पर सवाल लिखकर, अच्छी तरह मोड़कर काग़ज़ पर बने खांचों में रखने को कहा.

 

चंद्रास्वामी ने ध्यान लगाया और थैचर से कोई एक सवाल खोलकर मन ही मन पढ़ने को कहा.

 

फिर चंद्रास्वामी ने बताया कि सवाल क्या था. नटवर सिंह ने अंग्रेजी में अनुवाद करके थैचर को समझाया.

 

सवाल बिल्कुल सही था.

 

नटवर ने बीबीसी को थैचर के हाव-भाव के बारे में बताया. वह कहते हैं, “मैंने मार्गरेट थैचर को देखा तो चिढ़ की जगह अबउत्सुकता ले रही थी.”

 

दूसरा सवाल.... बिल्कुल सही.

 

चौथे सवाल तक आते-आते भविष्य की लौह महिला का व्यवहार बदल गया था. वह चंद्रास्वामी को एक आम व्यक्ति केबजाय एक सिद्ध पुरुण की तरह देखने लगी थीं.

 

पांचवा सवाल भी सही निकला.

 

थैचर और जानना चाहती थीं.

 

एक पहुंचे हुए गुरू की तरह चंद्रास्वामी ने अपनी चप्पलें उतार दीं और सोफ़े पर पद्मासन लगाकर बैठ गए.

 

नटवर कहते हैं कि यह देखकर वह तो घबरा गए थे लेकिन थैचर ने मौन अनुमति दे दी.

 

इसके बाद उन्होंने चंद्रास्वामी से और सवाल पूछे. नटवर सिंह दुभाषिये का काम करते रहे.

 

हर जवाब से ब्रिटेन की भविष्य की प्रधानमंत्री और ख़ुश नज़र आईं.

 

थैचर कुछ और सवाल पूछना चाहती थीं लेकिन चंद्रास्वामी ने घोषणा कर दी कि सूर्य अस्त हो गया है इसलिए और सवालनहीं पूछे जा सकते.थैचर ने पूछा कि वह उनसे फिर कब मिल सकती हैं?

 

बहुत शांति से चंद्रास्वामी ने कहा, “मंगलवार को दोपहर के 2.30 बजे श्री नटवर सिंह के घर पर.”

"मैंने मार्गरेट थैचर को देखा तो चिढ़ की जगह अब उत्सुकता ले रही थी"

 

नटवर सिंह बताते हैं कि उन्होंने चंद्रास्वामी को कहा कि वह अपनी सीमा लांघ रहे हैं. विपक्ष की नेता की सुविधा पूछे बिनाउन्हें समय और स्थान नहीं तय करना चाहिए.

 

नटवर सिंह ने कहा, “यह भारत नहीं है.”

 

लेकिन चंद्रास्वामी पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा. उन्होंने कहा, “कुंवर साहब अनुवाद कर दीजिए और फिर देखिए.”

 

नटवर सिंह कहते हैं कि वह सन्न रह गए

 

जब मार्गरेट थैचर ने पूछा, “उप उच्चायुक्त जी, आपका घर कहां है.”

 

सिर्फ़ इतना ही नहीं, चंद्रास्वामी ने एक ताबीज़ निकाला और कहा कि मार्गरेट थैचर मंगलवार को नटवर सिंह के घर आएं तोइसे अपने बाएं हाथ में पहन कर आएं.नटवर सिंह कहते हैं कि तब उनका गुस्सा किसी भी पल फूट सकता था.

 

नटवर सिंह ने बताया तो थैचर ने ताबीज़ ले लिया.

 

मंगलवार की दोपहर 2.30 बजे, कंजर्वेटिव पार्टी की नेता, मार्गेट थैचर सन हाउस, फ्रोग्नल वे, हैंपस्टड में पहुंच गईं.वह चटख लाल पोशाक पहने हुई थीं. ताबीज भी सही जगह पर बांध रखा था.

 

उन्होंने कई सवाल पूछे लेकिन सबसे महत्वपूर्ण उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं को लेकर था.

 

चंद्रास्वामी ने भी उन्हें निराश नहीं किया और भविष्यवाणी की कि वह नौ, ग्यारह या तेरह साल के लिए प्रधानमंत्री बनेंगी.थैचर ने आखिरी सवाल किया कि वह प्रधानमंत्री कब बनेंगी?

 

चंद्रास्वामी ने घोषणा की, “तीन या चार साल में.”

 

वह सही साबित हुए. थैचर ग्यारह साल तक प्रधानमंत्री रहीं.

( Courtesy : BBC Hindi)

 

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