Menu

Use Behavioural Astrology

Blog posts January 2013

Jyotish Yoga for Real Breaking News

ज्योतिष के कितने प्रयोग हमारी रोज़मर्रा की जिन्दगी में हो सकते हैं,  मैं उनके कुछ उदाहरण इस ब्लॉग के जरिये आगे आने वाले दिनोँ में प्रस्तुत करूंगा।  हम सभी लोग टीवी के ब्रेकिंग न्यूज से परिचित हैं।मैं यहाँ असली वाली  ब्रेकिंग न्यूज की बात  कर रहा हूँ . यह कब शुरू होगी यह जानना काफी कठिन है ,ठीक वैसे ही जैसे कि  यह जानना कि  शादी के बाद दंपत्ति को संतान कब होगी . लेकिन संतान होने के बाद उसकी आयु के बारे में बताना आसान है, जो एक दिन से लेकर 100 साल तक हो सकती है। 
 
      ज्योतिष से ब्रेकिंग न्यूज की उम्र कितनी होगी, यह जानना थोड़ा सरल है।इसका रहस्य सिर्फ इतना है कि 9 ग्रहोँ में से पृथ्वी  से धीमी गति से चलने वाले ग्रहोँ के राशि परिवर्तन , वक्री या मार्गी होने  या आपस में मिलने से  ब्रेकिंग न्यूज की शुरुआत होती है। इनमें शनि , राहु -केतु  , गुरु व मंगल ही धीमी गति से चलने वाले ग्रह  हैं  .अत: इन्हीं ग्रहोँ की  चाल व  चरित्र के विवेचन से ब्रेकिंग न्यूज की अवधि का पता लगाया जा सकता है।
 
अब मैं देश को हिला देने वाली 16 दिसम्बर 2012 की दिल्ली की शर्मनाक घटना की  ब्रेकिंग न्यूज  की समयावधि की चर्चा करूंगा ...
1.  इस घटना का अंतर्राष्ट्रीय असर क्योँ हुआ , यह जानने के लिए पहले मैं भारत की स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1947, मध्यरात्रि की कुंडली की थोड़ी चर्चा करना आवश्यक समझता हूँ।        
 
 
ज्योतिष में किसी भविष्यवाणी के लिए शुद्ध समय ज्ञात होने पर उसकी कुंडली बनाई जाती है . उसके बाद उसमें चन्द्रमा की नक्षत्र  स्थिति से उसका  विंशोत्तरी दशा क्रम तय होता  है और चन्द्र राशि से गोचर ग्रहोँ के रोज होने वाले परिवर्तन का असर देखा जाता है।दशा व गोचर के सम्मिलित फल से घटना का जन्म होता है। 
 
मैं एक उदाहरण से इसे स्पष्ट करना चाहूंगा। अगर आप के पास एक बड़ा खेती का भूखंड है तो उसकी सिचाई के लिए पानी दो तरीकोँ से मिल सकता है . एक बोरिंग से और दूसरा बारिश से  या दोनो  से . बोरिंग का जल आपके खेत की भूमिगत बनावट और भू जलस्तर पर निर्भर है जबकि बारिश आपके इलाके में सबके यहाँ एक सी होगी पर आपके खेत में कितना बारिश का पानी रुकेगा वह पुन: आपके खेत के ढलान  आदि पर निर्भर होगा . इसलिए पहाड़ोँ  पर बहुत बारिश होने पर भी पानी की कमी रहती है।
 
ऊपर के उदाहरण में बोरिंग या हैंडपंप  का पानी विंशोत्तरी(100+20=120 साल ) दशा के फल की तरह लम्बे समय तक व निश्चित मात्रा में  एक जैसा मिलता  है जबकि गोचर फल  बारिश के पानी की तरह मिलता है जिसकी अवधि  तो सीमित होती  है पर  मात्रा न्यून से बाढ़ तक कुछ भी हो सकती है। 

भारत के लिए सूर्य महादशा फल :
 
भारत की कुंडली में चन्द्रमा कर्क (चौथी 4 ) राशि में है।इसके अनुसार वर्तमान में सूर्य महादशा 2009 से चल रही है जिसका समय UPA -2 की सरकार की शुरुआत  से मिलता जुलता है।    

 भारत की लग्न वृष है , जिसका स्वामी शुक्र ग्रह है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सन 1965 तक शनि ,1982 तक बुध ,1989 तक केतु व 2009 तक स्वयं शुक्र की महादशा चली . इनमें केतु को छोड़ कर बुध व् शनि लग्नेश के मित्र थे और 1989 से 2009 तक लग्नेश शुक्र स्वयं महादशा का स्वामी था .इसलिए ज्यादातर समय भाग्य ने सरकारोँ का साथ दिया , केवल केतु महादशा में सरकार की मुखिया इंदिरा गांधी को जान गवानी पड़ी .   

 
   अब 2009 से 2015 तक सूर्य , 2025 तक चन्द्र और 2032 तक मंगल ग्रहोँ  की    महादशायें चलेंगी जो लग्नेश शुक्र के शत्रु  ग्रहोँ की हैं . इनमें भी सूर्य दशा  सरकार के लिए , चन्द्र दशा आम जनता के लिए व मंगल दशा सशस्त्र  पुलिस व फ़ौज के लिए पीड़ा व अपमान का समय हैं .
 
वर्तमान सूर्य महादशाके अंदर  15 अगस्त 2012 से 30 अप्रैल 2013 तक सूर्य के धुर विरोधी शनि की अन्तर्दशा है।सूर्य वैसे भी चौथे सुख भाव का स्वामी है जो ज्यादा आरामतलबी  करने पर अपमान देता  है। 
 इस प्रकार दशा व अन्तर्दशा दोनो ही सरकार के लिए ख़राब चल रही हैं।यानी बोरिंग फेल है।
  

 
  
गोचर फल 


18 दिसंबर 2012  के निम्न  चार्ट में भारत की राशि कर्क ( 4) से गोचर दृश्य  देखिये। 

       
1. इसमें सबसे धीमें चलने वाला ग्रह शनि तुला राशि में दिख रहा है जो नवम्बर 2011 से 2014 अंत तक वहीं रहेगा . शनि भारत की राशी कर्क से चौथे स्थान पर है और शनि की कर्क राशि  पर ढैय्या चल रही है। चौथे स्थान से शनि सीधे दशवें स्थान को 2014 तक देखता रहेगा . दसवां स्थान राज्यसत्ता के प्रमुख का माना गया है अत: शनि 2014 अंत तक भारत सरकार के लिए अपमानजनक स्थितियां उत्पन्न करता रहेगा . 
 
2. दिसंबर 2012 अंत से राहु-केतु भी तुला -मेष  में शनि के साथ आ चुके हैं और वे भी डेढ़ साल तक  इन्हीं परिस्थितियोँ  को बढ़ाएंगे .
 
3. किसी जगह गोला बारूद अगर इकठ्ठा  हो तो विस्फोट के लिए आग की आवश्यकता पड़ती है और यह विभाग मंगल ग्रह के पास है जो युवावस्था , गर्मी ,गुस्सा , आग ,बल प्रयोग ,डकैती   व किसी भी प्रकार की दुर्घटना से होने वाली  शारीरिक हानि का कारक है।
 
वर्तमान घटना 16 दिसंबर की रात में शुरू होती है लेकिन मंगल ग्रह का प्रवेश मकर राशि में 18 तारीख को होता है और दशम स्थान पर उसकी चौथी दृष्टि  पड़ते ही गोचर में सबसे विस्फोटक योग बनता है और इससे पहले कि सरकार संभले , एक मामूली घटना अभूतपूर्व अंतर्राष्ट्रीय घटना बन जाती है .
 
आप अखबार उठा के देखिये , 17 व 18 तारीख के अखबार  में पहले पेज में इस न्यूज का  कोई ज़िक्र नहीं है लेकिन 19 तारीख से ब्रेकिंग न्यूज पहले पेज पर जो  चालू हुई तो वह अभी तक रुकी नहीं है और भारत सरकार के साथ अन्य प्रदेश सरकारोँ   की नींद हराम है। अन्दर के भी सभी पेज सिर्फ रेप की घटनाओं से भरे पड़े हैं .
  
ज्योतिष में बुरी घटनाओं के लिए खराब महादशा ,खराब अंतरदशा , शनि की ढैय्या या साढ़े साती का प्रमुख योगदान माना जाता है . आज की तारीख में यह तीनो तो भारत की कुंडली में लागू हैं ही , बल्कि राहू-केतु व मंगल भी अपना योगदान 18 दिसम्बर से कर रहे हैं। 

इनके अलावा धीमी चाल से चलने वाला सिर्फ गुरु ग्रह है जो  शुभ ग्रह होकर दुर्घटना को कम कर सकता था लेकिन दसवें भाव से अलग वह 11वें भाव में बैठा है अत: सरकार की जितनी मज़म्मत  होनी थी हुई .  हाँ , जन आंदोलन  में जो हिंसा संभावित थी  वह गुरु की नवीं दृष्टि की वजह से  नहीं हुई .



 ऊपर  के चित्र में आप देख सकते हैं मंगल की  सीधी दृष्टि जनता  पर व चौथी दृष्टि सत्तारूढ़ दल पर या सरकार पर है। शनि की सीधी दृष्टि सरकार पर व दसवीं पूर्ण  दृष्टि जनता पर है . अत: शनि व  मंगल दोनो ही जनता ( पीड़ित व्यक्ति ) व सरकार दोनो के लिए सरदर्द हैं।

 गुरु की एक मात्र दृष्टि इनमें से केवल मंगल  व जन आन्दोलनकारियोँ  पर है जो नेताओं के बहकावे में न आकर अहिंसक विरोध करती रही  . पुलिस मंगल की प्रतीक है और गुरु की भाग्य दृष्टि होने की वजह से अपराधियोँ को शीघ्र पकड़ने में कामयाब रही और कुछ इज्जत बचा सकी .

 राहु (विदेश का कारक)  की दृष्टि की वजह से सरकार को अंतर्राष्ट्रीय निंदा का सामना भी करना पड़ा और सिंगापुर के इलाज का नाटक करना पड़ा .गुरु दृष्टि जनता पर न होने से पीड़िता की मृत्यु 18 तारीख के बाद तय थी .    

ब्रेकिंग न्यूज कब तक ?


18 दिसंबर से चली ब्रेकिंग न्यूज में कमी 26 जनवरी के बाद ही आयेगी जब मंगल मकर से निकल कर कुम्भ राशि में जाएगा . तब तक भारत की कुंडली में सरकार का  प्रतीक दशम भाव , शनि ,मंगल ,राहु -केतु की जकड़ में रहेगा . 
 
स्थितियां 26 जनवरी के बाद भी तनाव पूर्ण (शनि व  राहु केतु  का उपद्रव जारी रहेगा) ) किन्तु  मंगल रूपी  माचिस के  न होने से स्थिति कुछ नियंत्रण में रहेगी .

शनि व  मंगल के उपद्रव का कुछ छोटा एपीसोड आपको 13 अप्रैल 2013 से मई 2013 अंत तक फिर से देखने को मिल सकता है  जब मंगल रूपी माचिस  स्वयं अपनी ही राशि मेष में दशम स्थान पर तंग करने फिर से  पहुँच चुका होगा, केतु वहां  अभी से  मौजूद है और शनि  व राहु  वहां अभी से  दृष्टि डाल रहे हैं  और गुरु मुंह फेरकर अलग थलग अभी की तरह बैठा रहेगा.
 
 
अंत में घटनाके अभूतपूर्व होने के ज्योतिषीय कारणोँ पर प्रकाश डालना भी आवश्यक है।

       पहले तो घटना कई  मामलोँ  में अभूतपूर्व है . भारत  में  , दिल्ली में ही 1 करोड़ से ऊपर की आबादी है  जिसमें दसियोँ  लाख नवजवान  आबादी  ऐसी है जो अकेले रहती है और जिस की  सेक्स की भूख  समाजस्वीकृत  तरीकोँ  से  पूरी नहीं हो सकती . इसलिए कितना ही प्रवचन दें , क़ानून का डर दिखाएँ , पुलिस बढायें , रेप और गैंग  रेप को पूरी तरह से समाप्त करना मुश्किल है। 
 
    भारत सरकार के कर्णधारोँ  के लिए दिल्ली में गैंग रेप एक मामूली क़ानून व्यवस्था की समस्या से ज्यादा कुछ नहीं होना चाहिए था . सन 2012 में ऐसी जाने कितनी घटनाएं दिल्ली में हो चुकी होँगी ।  फिर ऐसा क्या योग था जो प्रधानमंत्री व सोनिया गांधी रात को कड़ाके  की ठण्ड में 4 बजे एक अनाम गुमनाम लड़की के शव को रिसीव करने और श्रद्धांजलि देने एयरपोर्ट पर पहुंचे . हालांकि राहुल गांधी सदा की तरह कहीं अदृश्य थे . ऐसा पहले कब हुआ कि  सरकार और बड़े लोगोँ  ने एक अनाम साधारण नागरिक के दुःख में अपने नए साल के जश्न कैंसिल कर दिए होँ .ऐसा तो विलास राव देशमुख के मन्त्री के तौर पर मरने पर नहीं हुआ .   
 
इसका स्पष्ट ज्योतिषीय कारण है . 

1. शनि  व मंगल का मिलन गुरु की अनुपस्थिति में कलह व  दुर्घटना का कारण माना जाता है . शनि जनता व मंगल सुरक्षा बलोँ का कारक माना जाता है . दोनो  ही ग्रह एक साथ उच्च के होने से घटना को न सिर्फ उच्चता व   ख्याति मिली बल्कि जन सुरक्षा के उच्च मापदंडो की चर्चा भी हुई . 


2.  शनि 30 वर्ष में एक बार ही उच्च राशि तुला में जाता  है . राहू -केतु 9 या 18 साल में ही एक बार मेष या तुला में हो सकते हैं . मंगल मकर राशी में 2 साल में एक बार ही उच्च का होता है . तीनोँ ग्रह एक साथ मेष राशि को इस स्थिति में पीड़ित कर सकें , ऐसा गृह योग 30 से 100 साल में एक बार ही हो सकता है . पुन:  उसी समय  गुरु ग्रह की मेष राशि पर किसी भी तरह की शुभ दृष्टि न हो , ऐसा योग  होना तो शायद 100 साल में भी मुश्किल है। अत: घटना वाकई अभूतपूर्व थी . 


3. पिछले एक महीने में महिलाओं पर इसी तरह की अत्याचार की कई घटनाएं हुईं जैसे पंजाब में अकाली दल के कार्यकर्ता द्वारा पुलिस इंस्पेक्टर की बेटी से छेड़छाड़ और इंस्पेक्टर पिता द्वारा पूछताछ  पर उसी की हत्या कर दी गयी  .लेकिन समय की ताकत उस घटना के साथ न होने से वह ब्रेकिंग न्यूज  सिर्फ पंजाब तक  ही एक दो दिन चली।  


    अत: यह कहा जा सकता है  कि ग्रहोँ  के अद्भुत योग से ही ब्रेकिंग न्यूज शुरुआत  होती है और योग समाप्त होने पर ख़त्म भी हो  जाती है। 

Go Back

Talented Executives leave ! Dead wood doesn't...

Every company faces the problem of people leaving the company for better pay or profile.

Early this year, Mark, a senior software designer, got an offer from a prestigious international firm to work in its India operations developing specialized software. He was thrilled by the offer.

He had heard a lot about the CEO. The salary was great. The company had all the right systems in place employee-friendly human resources (HR) policies, a spanking new office,and the very best technology,even a canteen that served superb food.

Twice Mark was sent abroad for training. "My learning curve is the sharpest it's ever been," he said soon after he joined.

Last week, less than eight months after he joined, Mark walked out of the job.

Why did this talented employee leave ?

Arun quit for the same reason that drives many good people away.

The answer lies in one of the largest studies undertaken by the Gallup Organization. The study surveyed over a million employees and 80,000 managers and was published in a book called "First Break All The Rules". It came up with this surprising finding:

If you're losing good people, look to their immediate boss .Immediate boss is the reason people stay and thrive in an organization. And he 's the reason why people leave. When people leave they take knowledge,experience and contacts with them, straight to the competition.

"People leave managers not companies," write the authors Marcus Buckingham and Curt Coffman.

Mostly manager drives people away?

HR experts say that of all the abuses, employees find humiliation the most intolerable. The first time, an employee may not leave,but a thought has been planted. The second time, that thought gets strengthened. The third time, he looks for another job.

When people cannot retort openly in anger, they do so by passive aggression. By digging their heels in and slowing down. By doing only what they are told to do and no more. By omitting to give the boss crucial information. Dev says: "If you work for a jerk, you basically want to get him into trouble. You don 't have your heart and soul in the job."

Different managers can stress out employees in different ways - by being too controlling, too suspicious,too pushy, too critical, but they forget that workers are not fixed assets, they are free agents.


When this goes on too long, an employee will quit - often over a trivial issue.

Talented men leave. Dead wood doesn't.

Go Back

Benefits of Having a Family Astrologer

      Family is the first and basic unit of human society. We all belong to a family and our decisions during  active life are mostly centered around family. During any event of joy or sorrow, we take refuge of our family only. We keep many secrets within our family only.Most of us live and willing to die for our family .

      While we solve many of our  personal and family problems by interacting  within  the family, there are many issues in our modern day living , which cannot be solved within  family because of lack of necessary expertise.

   There comes the need of having an extended family. Our friends usually make up for this requirement. But still , there is need of expert advice in many critical issues, like medical, legal, psychiatric, career or spiritual issues.

  Most of us remain oblivious of the need of such experts till we face an emergency in these area.

  However, during critical periods, we have very little time to find out a good doctor, lawyer, teacher or consultant and we have to accept any xyz person to deal with such moments of crisis.

  Most of the time , it will turn out that the advice given by such randomly picked expert, not only aggravated the issue but resulted in the loss of money or life also.

  Therefore , only solution lies  in having a genuine expert as member of our extended family , before crisis happens.

  British people introduced the concept of family doctor for this reason only. A family doctor knows every family member's medical history, the lifestyle and way of thinking. This knowledge comes to doctor from repeated interactions with family members over a period of time.

  Therefore, a family doctor is always in a position to advise correctly even at  short notice, while just any  randomly picked doctor will not have the necessary past data of patient and he has to go by intelligent guesses and trial & error method only.

   Family doctor can give preventive advice also. The trust of family on such doctor also adds the recovery of patient fast. Having a family doctor saves a lot of time, efforts and unnecessary stress of finding a doctor during a crisis. Fees wise also , such doctor is economical.

    Just as for medical emergency, we have a family doctor, we may have a family lawyer, investment-cum-tax consultant (CA) also.

  Having such permanent consultants relieves us from potential losses and worries and we can depend upon their expertise and experience. They also add to our general awareness about health,law or taxes etc because of regular interaction with them. We gain much more from such permanent family consultants and they join us in our family functions  and crisis also.

   Chances of a foul or cursory advices are rare in such cases. Still we always have a choice of  taking a second opinion from other experts also.

SPIRITUAL CONSULTANTS 

  We all know that we are a body-mind set up , so we have both needs simultaneously. So far, we discussed the consultants , who helped us at physical level by solving our body or money related issues. But human beings have a strong mental awareness level.

   So, we frequently need more help from mental consultants . Generally this role is played by elders, teachers, peers etc. In Indian traditions, we used to have a family guru , called KULGURU, who did all these roles together.

   With the disintegration of joint families, this institution also disappeared and many new westernised consultants like psychologists, psychiatrists, career and educational consultants, psychic healers, astrologers and many Babaji have come up.

  Problem with spiritual consultants is that their qualifications are not standardised like in medical or law discipline. So any Tom, Dick and Harry can market himself as bigshot expert of spirituality overnight by using TV / internet and cheat millions from  public.

    So, question arises how to find out a true spiritual consultant ?

Remember  !   Vashistha was Kulguru to Dashrath  &  Ram and Chanakya to Chandragupt .

   If we analyse the qualities of  such Kulgurus, we find that they were expert in solving tricky problems, detached from monetary benefits, lived a simple uncomplicated life with their families out of city , while having strong faith in God.  All of these were learned persons having compulsory knowledge of scriptures, Ayurveda , Jyotish and politics etc .

 They had potential to become Kings themselves but they preferred to be King-makers ! They never fell for trap of Power and that was their  greatest Power and asset.

  Since our mental needs have not changed since time of Rama and Chandragupta, so we need similar Gurus even today.So, if you encounter any modern Babaji or Guruji , apply following checklist :

  •  His awareness and exposure to modern life and its contemporary issues.

  •  His education : modern & ancient i.e. use of English and other modern languages,computers etc alongwith   Jyotish, Puranas ,Ayurved etc .

  •  How he solved his own problems of profession , money and family.

  •  His approach to money , publicity and political power.

  •  His past  &  future ambition in life.

       While above checklist is handy to check any bogus Guru, there is one very good touchstone for testing a Guru . You just stay with the person without talking for about an hour and if you feel calm and peaceful, then he can give you peace , the prime attribute of a Guru. If it is not possible to be near him , talking on phone will also give you some peace immediately.

      Only that  person who is at peace with himself , can deliver peace to others also. A new born child has no issues with this world and so he is at peace with himself. Anybody who takes such baby in his lap, also feels similar peace and happiness as long as he is with the child.

For such Guru, money hoarding is never the goal.

     Deep knowledge of astrology leads to detachment from worldly things and great internal peace in the person. Remember that astrology was invented for search of God , not for money. All famous Kulgurus and Gurus in ancient India had all these attributes and they were respected for these features only.

    While searching a Guru like Vashistha in modern cities will be foolish, still , there are some persons who fulfill some of the attributes. In modern days, if you could get a good astrologer, with sound concepts of astrology with spiritual interpretations, that is more than enough.

Reason is that without astrology, spirituality cannot be rocksolid. So, if your  Guru is not knowing astrology, he himself cannot get the hint of his future, which is a necessary attribute  to be a visionary for others. To lead a blind , one must have eyes.

Initially , test the astrologer for his predictions over a time and not one sundry prediction to understand him. Also, ask for astrological explanation for the prediction in writing. Get it checked by another astrologer and see whether other astrologers agree with that logic .

Once you find an expert and honest astrologer, it is important that you make him your family astrologer. If the astrologer has Kundli of all your family members, it become easier to predict and confirm the interlinked destiny in a family.

Astrology is a complex science and a person is affected by the destiny of the co-living person, whosoever he is. A minister's driver sitting close to minister in his official car shares the destiny of minister by becoming important and getting good treatment from others and at the same time,  becomes himself vulnerable also  to any  attack on minister .

Thus , destiny works both ways and a group reading is better than individual reading of a horoscope.

As per astrology the geometry of life changes with addition or deletion of family members. So, alone you are a point, after marriage ,there are two points making it a line and after one child, it is a triangle and so on.Therefore, destiny compulsorily takes a change for better or worse , when a living entity ( even animals also) joins or separates from you. A family astrologer can keep a track of all this and find the missing link.

   

    Many times , a right solution or idea for your problem may come to astrologer  after some days. In case of family astrologer , it will be communicated immediately to you. But in case of casual consultation with any random astrologer , it is quite possible that you may not get correct solution immediately and later on astrologer will not call you.

 

Astrologically also , the right solution comes at appropriate astrological moment. So, you must have a continuing relationship with astrologer . That is the greatest reason behind keeping a family astrologer , just as kings kept a battery of Raj Jyotishis all their life.

Go Back

3 Blog Posts